Friday, August 6, 2021
Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षा16% बढ़ी महिला पुलिसकर्मियों की 'शक्ति': बिहार सबसे आगे, J&K और तेलंगाना सबसे पीछे

16% बढ़ी महिला पुलिसकर्मियों की ‘शक्ति’: बिहार सबसे आगे, J&K और तेलंगाना सबसे पीछे

महिला पुलिकर्मियों की सबसे बढ़िया साझेदारी बिहार में 25.3% के साथ दर्ज हुई। इसके बाद हिमाचल, चंडीगढ़ और तमिलनाडु में रहा। जम्मू कश्मीर पुलिस में सबसे कम महिलाओं की साझेदारी देखने को मिलती है और इसके बाद तेलंगाना में भी...

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की महिला पुलिसकर्मियों की शक्ति (संख्या) में इस वर्ष 16% का इजाफा हुआ है। 1 जनवरी से यदि जोड़ें तो इस वर्ष महिलाओं की साझेदारी में 10.3% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले वर्ष यह प्रतिशत 8.9 फीसद था। एक ऐसे क्षेत्र में जहाँ दशकों से पुरुष प्रधानता का बोलबाला रहा हो, वहाँ महिलाओं की इस बढ़ती साझेदारी को खूब सराहा जा रहा है।

इस क्षेत्र में सबसे बढ़िया साझेदारी महिला पुलिकर्मियों की बिहार में 25.3% के साथ दर्ज हुई। इसके बाद हिमाचल में यही शेयर 19.15%, चंडीगढ़ में 18.78% और तमिलनाडु में 18.5 % देखने को मिला। जम्मू कश्मीर पुलिस में सबसे कम महिलाओं की साझेदारी देखने को मिलती है और इसके बाद तेलंगाना में भी यही हाल है।

यह सारी जानकारी ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ने मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) को मुहैया करवाई। उन्होंने इस ओर भी ध्यान आकर्षित करवाया कि प्रति लाख के हिसाब से पुलिस संख्या में पिछले साल के मुकाबले (158.2) इस वर्ष (155.7) गिरावट देखी गई।

इसके अलावा यह भी पता चला कि राज्यवार ढंग से पुलिस जनसंख्या अनुपात की गणना में सबसे सशक्त नागालैंड है। वहाँ प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से 1301 पुलिसकर्मी हैं। इसी तरह अंडमान एंव निकोबार, मणिपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश में भी पुलिस जनसंख्या का आँकड़ा सराहनीय है। वहीं प्रति लाख में पुलिस जनसंख्या का सबसे निम्न आँकड़ा बिहार, दमन एंड दिउ, पश्चिम बंगाल, आँध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर बताती है कि राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में पुलिसकर्मियों की स्वीकृत शक्ति 26.23 लाख होती है, लेकिन वास्तविकता में ये आँकड़ा सिर्फ 20.9 लाख तक सीमित है। आँकड़े बताते हैं कि कुल मिलाकर राष्ट्रभर में पुलिसबलों में कर्मियों के लिए स्वीकृत पदों का लगभग पाँचवाँ हिस्सा खाली रहता है।

हालाँकि, पूरे राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में महिला पुलिसकर्मियों की शक्ति 1.85 लाख से बढ़कर 2.15 लाख हो गई, जो बताता है कि इनमें 16% की वृद्धि हुई।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों (CAPFs) में उनकी हिस्सेदारी केवल 2.9% थी। CAPF कर्मियों में ( ITBP, BSF, CRPF, CISF, SSB, NSG) में महिलाएँ 29249 की संख्या में थीं। इनमें CISF में इनकी संख्या 8,631, CRPF में 7,860 और BSF में 5,130 थीं।

बता दें कि केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं की साझेदारी ने साल 2014 के बाद उछाल देखा था। 2014 में इनकी संख्या 1.11 लाख हुआ करती थी और 2019 में ये संख्या 2.15 लाख पहुँच गई है। इनका एक कारण राज्यों द्वारा अपनाया गया आरक्षण का तरीका भी है। आज 14 राज्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देते हैं। 2 राज्य 20 फीसद कोटा और तीन राज्य 10 फीसद कोटा देते हैं। इसके अलावा केंद्रीय फोर्स में भी लड़कियों के लिए आरक्षण लेकर आया गया है। 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पाकिस्तान में गणेश मंदिर तोड़ने पर भारत सख्त, सालभर में 7 मंदिर बन चुके हैं इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मंदिर तोड़े जाने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया है।

अफगानिस्तान: पहले कॉमेडियन और अब कवि, तालिबान ने अब्दुल्ला अतेफी को घर से घसीट कर निकाला और मार डाला

अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने भी अब्दुल्ला अतेफी की हत्या की निंदा की और कहा कि अफगानिस्तान की बुद्धिमत्ता खतरे में है और तालिबान इसे ख़त्म करके अफगानिस्तान को बंजर बनाना चाहता है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
113,169FollowersFollow
395,000SubscribersSubscribe