Homeराजनीतिकॉन्ग्रेस की 'चमत्कारी' डायरी के बाद सोशल मीडिया पर जनता ने शेयर की अपनी...

कॉन्ग्रेस की ‘चमत्कारी’ डायरी के बाद सोशल मीडिया पर जनता ने शेयर की अपनी डायरियाँ

बीएस येदियुरप्पा को फँसाने की कोशिश में कॉन्ग्रेस ने इस तरह के नोट को माध्यम बनाया है। सोशल मीडिया पर तमाम यूज़र्स ने इस नोट की चौतरफा आलोचनाएँ की और इस बेतुकी हरक़त के जवाब में उन्होंने कॉन्ग्रेस को आईना भी दिखाया।

भाजपा के ख़िलाफ़ एक अजीब आरोप में, कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर अपने कार्यकाल के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेताओं को भुगतान करने का आरोप लगाते हुए एक डायरी शेयर की है। सुरजेवाला ने एक पेपर की फोटोकॉपी शेयर की, जिसमें हाथ से लिखे हुए नोट थे। इस प्रकार के नोट के लिए दावा किया गया कि यह नोट येदियुरप्पा द्वारा लिखे गए हैं जिस पर उनके हस्ताक्षर थे। इसमें येदियुरप्पा द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दी गई राशि का उल्लेख किया गया।

एक नोट जिसे लेकर कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि वह बीएस येदियुरप्पा ने लिखा है


बता दें कि बीएस येदियुरप्पा को फँसाने की कोशिश में कॉन्गेस ने इस तरह के नोट को माध्यम बनाया है। सोशल मीडिया पर तमाम यूज़र्स ने इस नोट की चौतरफा आलोचनाएँ की और इस बेतुकी हरक़त के जवाब में उन्होंने
कॉन्ग्रेस को आईना भी दिखाया।

कुछ लोगों ने कॉन्ग्रेस की ‘डायरी’ के आरोपों का मजाक उड़ाने और उसके जवाब के लिए ख़ुद के लिखे नोट को शेयर करना शुरू कर दिया।

जैसा कि ऊपर देखा जा सकता है ऑपइंडिया के सीईओ राहुल रौशन पर आरोप लगाया गया था कि उन्हें UnReal Times द्वारा ₹25 करोड़ का भुगतान किया गया। इन आरोपों से लैस, शुभचिंतकों ने रोशन के ख़िलाफ़ विद्रोह करने के मक़सद से ऑपइंडिया के कर्मचारियों को न सिर्फ़ उकसाने का प्रयास किया बल्कि उन्हें टैग करना भी शुरू कर दिया कि राहुल रौशन ₹25 करोड़ में से किसी को एक पैसा नहीं देंगे।

हालाँकि, ऑपइंडिया के कर्मचारियों ने बताया था कि उनके सीईओ राहुल रौशन वास्तव में अपने कर्मचारियों से पैसे लेते हैं ताकि वे उन्हें नौकरी दे सकें।

जल्द ही, इस तरह के अन्य कई हस्तलिखित नोट्स ट्विटर द्वारा शेयर किए गए।

बीएस येदियुरप्पा को फँसाने की लिए जिस डायरी का इस्तेमाल किया जा रहा है बीजेपी ने उसे फ़र्ज़ी करार देते हुए येदियुरप्पा के असल हस्ताक्षर और लिखावट को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो कॉन्ग्रेस की फ़र्ज़ी डायरी से बिल्कुल मेल नहीं खाते।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -