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महाराष्ट्र में VVPAT की पर्चियों की EVM के वोटों में नहीं मिला कोई अंतर, चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी के विपक्षी दावों को किया खारिज

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने पूरी प्रक्रिया के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को साथ रखा था। इस दौरान सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक किए गए थे। यह पूरा प्रोसेस सीसीटीवी कैमरों के सामने किया गया, ताकि किसी को कोई आशंका ना रहे और नहीं बाद में किसी तरह का इस पर विवाद हो।

भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने कहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों की अनिवार्य गणना के दौरान कोई खामी नहीं पाई गई है। ECI ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सत्यापन प्रक्रिया सभी 288 निर्वाचन क्षेत्रों में आयोजित की गई। दरअसल, महाविकास अघाड़ी (MVA) ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।

आयोग ने कहा कि दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम रूप से चयनित पाँच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गणना करना आवश्यक है। आयोग ने दिशा-निर्देशों के तहत काम किया और उसे किसी तरह का मिसमैच नहीं मिला। आयोग ने परिणाम के दिन 23 नवंबर को मतगणना पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पर्चियों की गिनती की।

चुनाव आयोग
चुनाव आयोग (साभार: TOI)

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने पूरी प्रक्रिया के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को साथ रखा था। इस दौरान सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक किए गए थे। यह पूरा प्रोसेस सीसीटीवी कैमरों के सामने किया गया, ताकि किसी को कोई आशंका ना रहे और नहीं बाद में किसी तरह का इस पर विवाद हो।

महाराष्ट्र के सभी 36 जिला चुनाव अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, सभी निर्वाचन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में दर्ज वोटों की उम्मीदवार के अनुसार संख्या वीवीपीएटी पर्चियों से पूरी तरह मेल खाती है। इसके लिए कुल 1,440 वीवीपैट पर्चियों की गिनती की गई।

दरअसल, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन आयोजित शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था। इसके कुछ दिनों के बाद चुनाव आयोग का यह बयान आया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हारने वाले विपक्षी दलों के 20 से अधिक उम्मीदवारों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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