Homeबड़ी ख़बरप्रियंका गाँधी वाड्रा की राजनीति में एंट्री, कॉन्ग्रेस का मास्टर स्ट्रोक?

प्रियंका गाँधी वाड्रा की राजनीति में एंट्री, कॉन्ग्रेस का मास्टर स्ट्रोक?

अब तक सिर्फ चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालने वाली प्रियंका गाँधी की राजनीति में औपचारिक एंट्री हो गई है। प्रियंका गाँधी को पूर्वी यूपी के लिए कॉन्ग्रेस जनरल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई है।

लोकसभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पार्टी के संगठन में फ़ेरबदल किया है। कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष ने प्रेस रिलीज़ जारी करके संगठन में होने वाले बदलाव की जानकारी मीडिया को दी है।

[poll id=”8″]

राहुल गाँधी द्वारा जारी प्रेस रिलीज में प्रियंका गाँधी को पूर्वी यूपी के लिए कॉन्ग्रेस जनरल सेक्रेटरी की ज़िम्मेदारी दी गई है। अब तक सिर्फ चुनाव प्रचार का ज़िम्मा संभालने वाली प्रियंका गाँधी की राजनीति में औपचारिक एंट्री हो गई है। इसी प्रेस रिलीज़ में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता वेणु गोपाल को ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया है। इसके साथ ही वेणु गोपाल को कर्नाटक की ज़िम्मेदारी भी दी गई है।

प्रियंका गाँधी कॉन्ग्रेस पार्टी में यह ज़िम्मेदारी फ़रवरी के पहले सप्ताह से संभालेंगी। इसके अलावा कॉन्ग्रेस पार्टी में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी नई ज़िम्मेदारी दी गई है। मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव के बाद यह संभावना थी कि सिंधिया को पार्टी ने भले ही मुख्यमंत्री की गद्दी न दी हो, परंतु संगठन में बड़ी ज़िम्मेदारी देने की संभावना है। हालाँकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए जनरल सेक्रेटरी बनाकर एक तरह से पार्टी ने सिंधिया को लॉलीपॉप थमा दिया है।

प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने उनको कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से नई ज़िम्मेदारी मिलते ही फेसबुक पर बधाई दी।

कॉन्ग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को हरियाणा का जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया है। इससे पहले
गुलाम नबी आजाद उत्तर प्रदेश जनरल सेक्रेटरी की भूमिका निभा रहे थे।

कॉन्ग्रेस पार्टी के संगठन में हुए इस बदलाव पर टिप्पणी करते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “बीजेपी में पार्टी ही परिवार है, जबकि कॉन्ग्रेस में परिवार ही पार्टी है। यूपी में तो गठबंधन से नकारे ही गए, बिहार में भी मनमुटाव चल रहा है।”


Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -