सबरीमाला मुद्दे पर राहुल गाँधी का U-टर्न

"मैं इस तर्क में वैधता देख सकता हूं कि परंपरा को संरक्षित करने की आवश्यकता है। मैं इस तर्क में भी वैधता देख सकता हूं कि महिलाओं को समान अधिकार होना चाहिए।"

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर राहुल गाँधी ने अब पलटी मारी है। पहले राहुल गाँधी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की पैरवी करते रहे हैं। अब उन्होंने अपने रुख में बदलाव करते हुए कहा है कि वह इस मुद्दे पर कोई ‘स्पष्ट’ रुख अख़्तियार नहीं कर सकते क्योंकि दोनों पक्षों के तर्कों में दम है। राहुल गाँधी ने हाल ही में दुबई में इस बारे में बयान देते हुए इस मुद्दे को काफ़ी जटिल बताया और कहा कि इस बारे में केरल की जनता ही निर्णय करेगी।

राहुल गाँधी ने ये भी स्वीकार किया है कि सबरीमाला मंदिर पर उनकी शुरुआती राय भिन्न थी। एक प्रेस मीटिंग में राहुल ने कहा:

“मैं इस तर्क में वैधता देख सकता हूं कि परंपरा को संरक्षित करने की आवश्यकता है और मैं इस तर्क में भी वैधता देख सकता हूं कि महिलाओं को समान अधिकार होना चाहिए। इसीलिए मैं इस मुद्दे को लेकर कोई सपाट बात नहीं कह सकता कि यही होना चाहिए। मैं इसे केरल के लोगों पर छोड़ता हूँ।”

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राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे की जटिलता का एहसास तब हुआ, जब उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी की केरल इकाई से इस बारे में जानकारी माँगी और इस मुद्दे को समझा। इस से पहले राहुल गाँधी इस मामले में महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश की पैरवी करते रहे हैं और उनका रुख श्रद्धालुओं के विरोध में रहा है। अक्टूबर में इस बारे में बयान देते हुए राहुल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि उनकी राय उनकी पार्टी की केरल इकाई से भिन्न है और वो सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश देने की पैरवी करते हैं।

कुल मिला कर देखा जाए तो सबरीमाला मंदिर विवाद पर कॉन्ग्रेस पार्टी, राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस की केरल इकाई- इन तीनों के विरोधाभासी विचार हैं। केरल कॉन्ग्रेस इस मुद्दे पर शुरुआत से ही श्रद्धालुओं के साथ है और राहुल गाँधी इस मुद्दे पर अपनी राय बार-बार बदलते रहे हैं। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर पार्टी की राज्य इकाई से अलग रुख अख़्तियार किया हुआ है। अब राहुल के ताजा बयानों के बाद ये कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कॉन्ग्रेस पार्टी सबरीमाला विवाद में श्रद्धालुओं का साथ देगी?

ज्ञात हो कि पिछले वर्ष सितम्बर में उच्चतम न्यायलय ने अपने निर्णय में कहा था कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश न देना संविधान के ख़िलाफ़ है। साथ ही अदालत ने महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी थी जिसके बाद केरल में हिंसा भड़क गई थी। इस निर्णय के बाद केरल में वामपंथी संगठन और श्रद्धालु आमने-सामने हैं और उनके बीच लगातार टकराव की स्थिति बनती रही है।

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