Homeदेश-समाजSC ने पुलवामा हमले के बाद कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा वाली जनहित याचिका स्वीकार...

SC ने पुलवामा हमले के बाद कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा वाली जनहित याचिका स्वीकार की

पुलवामा हमले के बाद कश्मीरी छात्रों पर हमले जैसी घटनाओं पर पुलिस द्वारा स्ष्टीकरण दिया जा चुका है कि ऐसी कोई घटना नहीं हो रही है, बावजूद इसके पूरे भारत में कश्मीरी छात्रों पर हमले जैसी अफ़वाहें प्रचारित और प्रसारित हो रही हैं। बेवजह ही ऐसी अफ़वाहों को हवा दी जा रही है जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

पुलवामा हमले के बाद देश भर में कश्मीरी छात्रों पर कथित तौर पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए देश की शीर्ष अदालत सहमत हो गई है।

CJI रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस की याचिका पर संज्ञान लिया और कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा से संबंधित मामले में तत्काल सुनवाई की माँग की। अदालत इस याचिका पर कल (22 फ़रवरी 2019) को सुनवाई करेगी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश भर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में कश्मीर घाटी के छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है। याचिका में इस तरह के हमले रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की माँग की गई है।

पुलवामा में 14 फ़रवरी को CRPF के क़ाफ़िले पर हुए भीषण हमले के बाद देश भर के लोगों के मन में इसको लेकर गहरा दुख और क्षोभ है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो आतंकी हमले का जश्न मनाने में व्यस्त थे। कई सोशल मीडिया यूज़र के साथ जश्न मना रहे लोगों के सहयोगियों ने भी शिकायतें कीं, कई छात्रों और कर्मचारियों को उनके देश विरोधी पोस्ट के लिए निलंबित और गिरफ़्तार भी किया गया।

पुलवामा हमले के बाद कश्मीरी छात्रों पर हमले जैसी घटनाओं पर पुलिस द्वारा स्ष्टीकरण दिया जा चुका है कि ऐसी कोई घटना नहीं हो रही है, बावजूद इसके पूरे भारत में कश्मीरी छात्रों पर हमले जैसी अफ़वाहें प्रचारित और प्रसारित हो रही हैं। बेवजह ही ऐसी अफ़वाहों को हवा दी जा रही है जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

इसके अलावा यह भी ग़ौर करने वाली बात है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने 1989-90 के दौरान हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में जाँच और बाद में मुक़दमा चलाने की माँग को ख़ारिज कर दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

सिनेमाई परदे पर यूरोप की सुलगती हकीकत है Citizen Vigilante Movie: समझें- क्यों परेशान हैं दुनिया भर के इस्लामी कट्टरपंथी और लेफ्ट लिबरल?

लिबरल और वामपंथी समीक्षक 'सिटीजन विजिलांते' फिल्म को चाहे कितनी भी कम रेटिंग क्यों न दें, इस फिल्म ने अपना काम कर दिया है।

BAT-BMS ऐप से ई-रिक्शा हैक हो सकता है तो EVM क्यों नहीं हैक हो सकती? लेफ्ट-लिबरल्स के ‘लॉजिक’ पर माथा गरम करने से पहले...

BAT-BMS ऐप को EVM से जोड़कर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की पड़ताल। जानिए कैसे काम करता है ऐप, क्यों हुई कार्रवाई और EVM इससे कैसे अलग है।
- विज्ञापन -