Saturday, November 28, 2020
Home राजनीति UP: मनरेगा का वार्षिक लक्ष्य महज 6 माह में किया पूरा, 26.1 करोड़ कार्य...

UP: मनरेगा का वार्षिक लक्ष्य महज 6 माह में किया पूरा, 26.1 करोड़ कार्य दिवस बनाने का रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश ने मनरेगा के तहत 26 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले महज 6 महीने में 26.1 करोड़ कार्य दिवस बनाने का रिकॉर्ड बनाया है।

योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने अपने नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। यह रिकॉर्ड महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के तहत 26.1 करोड़ मानव दिवस सृजन करने का है। इस योजना के तहत सालाना टारगेट 26 करोड़ का होता है। मगर इस वर्ष 6 महीने में ही प्रदेश ने अपना टारगेट हासिल कर लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मनरेगा का वार्षिक लक्ष्य 6 महीने में पूर्ण किए जाने पर अपना संतोष व्यक्त करते हुए कल कहा कि कोरोना काल में ग्रामीण इलाकों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मनरेगा के कार्यों को प्राथमिकता से संचालित कराया।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा के माध्यम से 26 करोड़ मानव दिवस सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालाँकि, इस लक्ष्य की 6 महीने में ही पूर्ति होते ही राज्य में अब तक मनरेगा के तहत 26.14 करोड़ मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में राज्य ने यह आँकड़ा इतनी जल्दी नहीं पार किया था। डेटा बताता है कि इस स्कीम के तहत लोगों का पंजीकरण हर बार 1.03 करोड़ तक स्थिर होता था जिससे लगभग 5 करोड़ तक मानव दिवस निर्मित हो पाते। बावजूद इसके ग्रामीण विकास विभाग ने साल 2015-16 में 52.11%, 2016-17 में 48.11%, 2017-18 में 46.81%, 2018-2019 में 49.60% और 2019-2020 में 43.69% का लक्ष्य पूरा किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह आइडिया इसलिए था ताकि इसमें उन लोगों को शामिल किया जा सके जो सामाजिक आर्थिक सूचकांक में कम हैं। यह केंद्र द्वारा चिह्नित किए गए स्थायी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। यह पहली बार है कि राज्य ने केवल आधी अवधि में योजना का वार्षिक लक्ष्य प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक बयान में कहा कि महामारी के चरम के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में वापस आने वाले प्रवासियों को रोजगार प्रदान करने में यह योजना काफी मददगार साबित हुई। वहीं एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार योगी आदित्यनाथ सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के एक महीने बाद 21 अप्रैल से प्रवासियों को नौकरी देना शुरू कर दिया था।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि रोकथाम के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को रॉ में बहाल करने जा रही है। जानिए, क्या है इस दावे की सच्चाई?

‘नॉटी, दो टके के लोग’: कंगना पर फट पड़ीं मुंबई की मेयर, ऑफिस तोड़ने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कंगना रनौत के लिए 'नॉटी' का इस्तेमाल किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए इस शब्द का अर्थ 'हरामखोर' है।

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन से ममता बनर्जी को सत्ता मिली। अब नंदीग्राम के शुभेंदु अधिकारी के बागी तेवरों ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

प्रचलित ख़बरें

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि रोकथाम के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को रॉ में बहाल करने जा रही है। जानिए, क्या है इस दावे की सच्चाई?

‘नॉटी, दो टके के लोग’: कंगना पर फट पड़ीं मुंबई की मेयर, ऑफिस तोड़ने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कंगना रनौत के लिए 'नॉटी' का इस्तेमाल किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए इस शब्द का अर्थ 'हरामखोर' है।

गाजीपुर में सड़क पर पड़े मिले गायों के कटे सिर: लोगों का आरोप- पहले डेयरी फार्म से गायब होती हैं गायें, फिर काट कर...

गाजीपुर की सड़कों पर गायों के कटे हुए सिर मिलने के बाद स्थानीय लोग काफी गुस्से में हैं। उन्होंने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।

बंगाल: ममता के MLA मिहिर गोस्वामी बीजेपी में शामिल, शनिवार को शुभेंदु अधिकारी के आने की अटकलें

TMC के असंतुष्ट विधायक मिहिर गोस्वामी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। शुभेंदु अधिकारी के भी शनिवार को बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही है।

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन से ममता बनर्जी को सत्ता मिली। अब नंदीग्राम के शुभेंदु अधिकारी के बागी तेवरों ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान: प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने में UP की योगी सरकार सबसे आगे

प्रवासी श्रमिकों को काम मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया था। उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

12वीं शताब्दी में विष्णुवर्धन के शासनकाल में बनी महाकाली की मूर्ति को मिला पुन: आकार, पिछले हफ्ते की गई थी खंडित

मंदिर में जब प्रतिमा को तोड़ा गया तब हालात देखकर ये अंदाजा लगाया गया था कि उपद्रवी मंदिर में छिपे खजाने की तलाश में आए थे और उन्होंने कम सुरक्षा व्यवस्था देखते हुए मूर्ति तोड़ डाली।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,439FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe