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‘तुमने पाकिस्तानी सेना को दी थी लोकेशन’: विक्रम बत्रा के इंटरव्यू पर फूली नहीं समा रही थीं बरखा दत्त, अचानक लगा उड़ता तीर, हुई फजीहत

जिस ट्वीट के कारण बरखा दत्त की फजीहत हुई है उसमें शुरू में ये बात नहीं कही गई थी कि बरखा दत्त ने कारगिल के दौरान क्या किया था। लेकिन, जब बरखा ने इसे अपनी तारीफ समझी तो यूजर ने उन्हें बताया कि ये तारीफ नहीं थी बल्कि उनको शर्मिंदा करने के लिए कही गई बात थी।

कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर बनी ‘शेहशाह’ मूवी के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर मिले-जुले रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं। कुछ लोग विक्रम बत्रा के सर्वोच्च बलिदान को सोचकर जहाँ भावुक हो रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा इस फिल्म के साथ न्याय नहीं कर पाए। हालाँकि, इस बीच बरखा दत्त वो शख्स हैं, जो अलग ही स्तर पर स्पॉटलाइट में बनी हुई हैं।

दरअसल, एक ट्विटर यूजर ने शेरशाह देखने के बाद ट्विटर पर लिखा, “शेरशाह देखी कल, इसने मुझे याद दिलाया कि आखिर कारगिल युद्ध में बरखा दत्त ने क्या किया था। फिल्ममेकर को उसका पार्ट भी दिखाना चाहिए था। कैप्टन बत्रा की ऊर्जा हमारे जेहन में दौड़ती है। कुछ ही लोग उस ऊँचाई पर जा पाते हैं। भावपूर्ण नमन।”

इस ट्वीट में यूजर क्या कहना चाहती थीं, ये संदर्भरहित था। हालाँकि, बरखा दत्त ने इसे अपनी तारीफ समझी और आभार व्यक्त करने लगीं। ऑथर ज्योति नाम की ट्विटर यूजर के ट्वीट पर उन्होंने लिखा, “धन्यवाद। ये दिल माँगे मोर, मेरा इंटरव्यू था और ये मेरे दिमाग और दिल में हमेशा रहेगा।”

इस ट्वीट के बाद एक क्षण ऐसा आया, जहाँ बरखा दत्त की फजीहत पर अधिकांश ट्विटर यूजर हँसने लगे। दरअसल, बरखा दत्त के ट्वीट के बदले उस यूजर ने लिखा था, “आपका स्वागत है, लेकिन मेरा मतलब था कि आपने पाकिस्तानी सेना को लोकेशन का एक्सेस दिया था। आगे की शर्मिंदगी से बचने के लिए आप मुझे ब्लॉक मार सकती हैं।”

अब यह दोनों ट्वीट और उनके जवाब एक साथ स्क्रीनशॉट लेकर शेयर हो रहे हैं और लोग जमकर बरखा दत्त की खिल्ली उड़ा रहे हैं। मालूम हो कि कारगिल युद्ध के दौरान बरखा दत्त का इंटरव्यू हमेशा विवादों में ही रहा है। लोगों का आरोप हमेशा यही रहा कि बरखा दत्त के कारण कम-से-कम एक दफा तो सेना को कारगिल युद्ध में भारी नुकसान हुआ था। अपनी किताब कारगिल: टर्निंग द टाइड में लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी ने पूरे वाकये का भी जिक्र किया हुआ है। उन्होंने बताया है कि कैसे बरखा ने उस ऑपरेशन की लाइव टेलीकास्टिंग कर दी थी, जिसे पूरी गोपनीयता के साथ चलाया जाना था। हालाँकि, किताब यह साबित नहीं करती कि बरखा की रिपोर्टिंग के कारण भारत को कोई जान का नुकसान हुआ या नहीं, लेकिन उनकी वह रिपोर्ट भारत के लिए चिंता का विषय जरूर बनी और किताब में इस बात की ओर इशारा भी हैं।

बता दें कि बरखा की रिपोर्टिंग पहली बार देश के दुश्मनों और आतंकियों के काम नहीं आई। मुंबई अटैक को याद करें तो पता चलता है कि 26/11 के समय भी बरखा देश की परवाह किए बिना कैमरे और माइक लेकर ऑन टीवी वो नजारा दिखा रहीं थीं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा था। आतंकी बाहर का सब कुछ टीवी में देख पा रहे थे, एक-एक पल की उन्हें जानकारी मिल रही थी और इसका कारण थीं बरखा दत्त। बाद में उन्होंने खुद माना भी था कि ये सब उनकी नासमझी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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