कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा नोएडा में औद्योगिक मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने पर भारत में ‘हलचल’ शुरू होने की बात कहकर खुशी जताने के कुछ हफ्तों बाद, BJP विरोधी राजनीतिक दलों को अब नेपाल या बांग्लादेश जैसी Gen-Z ‘क्रांति’ भड़काने की एक नई उम्मीद मिल गई है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम की इस तथाकथित ‘क्रांति’ ने सोशल मीडिया पर अचानक तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। हालाँकि, सामने आया है कि इंस्टाग्राम से लेकर विकिपीडिया तक, CJP के कई ‘तिलचट्टे’ यानी समर्थकों में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी लोगों और बॉट्स की भी बड़ी मौजूदगी है।
16 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अदालत में बेरोजगार युवाओं, वकीलों, पत्रकारों और RTI एक्टिविस्ट्स पर की गई टिप्पणी के जवाब में व्यंग्य (सटायर) के तौर पर बनाई गई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का अब अपना विकिपीडिया पेज भी बन चुका है।
हालाँकि, CJP के अंग्रेजी विकिपीडिया पेज को एडिट करने वालों में एक कथित पाकिस्तानी व्यक्ति का नाम सामने आया है। इस पेज को काफी हद तक सलीम बिन यूसुफ नाम के एक यूजर ने एडिट किया जिसने अपने विकिपीडिया लेखक प्रोफाइल में खुद को ‘कश्मीर, दक्षिण एशिया’ का निवासी बताया है।

यह बात पहले भी सामने आती रही है कि कई पाकिस्तानी लोग अपनी पहचान छिपाने के लिए ‘साउथ एशिया’ का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा या तो अपनी राष्ट्रीयता छिपाने के लिए किया जाता है या फिर भारतीय बनकर भारत के सामाजिक और राजनीतिक मामलों में दखल देने के लिए। नोएडा हिंसा के दौरान भी यह देखा गया था कि कई पाकिस्तानी X (पूर्व ट्विटर) यूजर्स ने हिंदू नामों वाले अकाउंट बनाकर और लोकेशन में ‘दक्षिण एशिया’ लिखकर खुद को भारतीय दिखाने की कोशिश की थी ताकि भारत में माहौल बिगाड़ा जा सके।

भारतीय बनकर सोशल मीडिया पर सक्रिय होने, मुद्दों को हवा देने, समाज में मौजूद मतभेदों का फायदा उठाने, लोगों की राय प्रभावित करने और हिंसा भड़काने की ऐसी घटनाओं को देखते हुए यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि सलीम बिन यूसुफ पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) का निवासी हो सकता है।
हालाँकि, यह संभावना भी जताई जा रही है कि यूसुफ कश्मीर का रहने वाला हो और अलगाववादी विचारधारा का समर्थक हो।

फिलहाल, यूसुफ को आंशिक रूप से ब्लॉक कर दिया गया है और अब उसका नाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विकिपीडिया ‘रिवीजन हिस्ट्री’ में दिखाई नहीं देता। CJP के टॉक पेज के अनुसार, 21 मई को सलीम बिन यूसुफ और अन्य एडिटर्स के बीच CJP के लोगो को बार-बार बदले जाने को लेकर चर्चा भी हुई थी।

इससे पहले भी सलीम बिन यूसुफ द्वारा बनाए गए कई पेज और किए गए कई एडिट्स को हटाने (डिलीट) के लिए नॉमिनेट किया जा चुका है। इनमें कई कश्मीरियों से जुड़े पेज और एडिट्स शामिल हैं। इसके अलावा, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज श्रीनगर, श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल और पाकिस्तान की कई चर्चित हस्तियों से जुड़े पेज भी इसमें शामिल रहे हैं।
CJP और इसके पाकिस्तानी, बांग्लादेशी व तुर्की के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स?
CJP को BJP विरोधी राजनीतिक दलों का तेजी से समर्थन मिल रहा है। इनमें कई पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा सांसद जैसे महुआ मोइत्रा और BJP विरोधी राजनीति करने वाले चेहरे शामिल हैं। ऐसे दलों द्वारा खुद को ‘एंटी-एस्टैब्लिशमेंट’ बताने वाले किसी तथाकथित आंदोलन का समर्थन करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन मामला तब गंभीर हो जाता है, जब भारत के विरोधी पड़ोसी देशों की कथित भूमिका और समर्थन के आरोप सामने आने लगें।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट और रिकॉर्डिंग साझा कर दावा किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या में आई अचानक भारी बढ़ोतरी पूरी तरह ‘ऑर्गेनिक’ नहीं है। हालाँकि, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके 94% फॉलोअर्स भारत से हैं।
इसके बावजूद, कई लोगों का दावा है कि CJP के करीब 2 करोड़ (20 मिलियन) फॉलोअर्स में पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और तुर्की अकाउंट्स की संख्या भी काफी ज्यादा है।
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी पर सटायर से शुरू हुई CJP, बनी BJP विरोधी प्रयोगशाला?
CJP का इंस्टाग्राम हैंडल तेजी से लोकप्रिय हुआ और X (पूर्व ट्विटर) पर भी चर्चा का विषय बन गया। लेकिन जल्द ही उसका ‘निष्पक्ष’ होने का दावा कमजोर पड़ता दिखा जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके का बीजेपी विरोधी एजेंडा सामने आने लगा।
कई लोगों के मन में सवाल उठा कि एक ऐसा मंच जो CJI सूर्यकांत जैसे गैर-राजनीतिक व्यक्ति की टिप्पणी पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ तो वह अचानक बीजेपी के साथ इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की होड़ का दावा करने और फिर पूरी तरह बीजेपी विरोधी राजनीतिक मंच में कैसे बदल गया?
इस सवाल का जवाब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि में मिलता है। दिपके फिलहाल अमेरिका में रहते हैं और बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। खुद को गैर-राजनीतिक और नाराज Gen-Z युवा के रूप में पेश करने की कोशिश के बावजूद यह किसी ने छिप ना सका कि उनका संबंध आम आदमी पार्टी (AAP) के चुनावी और सोशल मीडिया अभियानों से जुड़ा रहा है।
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान एक मीडिया रिपोर्ट में उन्हें पुणे के 23 वर्षीय ऐसे युवक के रूप में बताया गया था जो AAP के सोशल मीडिया बदलाव के पीछे का चेहरा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि AAP, अरविंद केजरीवाल को प्रमोट करने और BJP-कॉन्ग्रेस पर हमला करने के लिए बढ़िया वन-लाइनर, पैरोडी वीडियो, छोटे क्लिप और मीम्स का इस्तेमाल कर रही थी।
अभिजीत दिपके ने उस दौरान कहा था कि मिलेनियल्स और पहली बार वोट देने वालों तक राजनीतिक संदेश पहुँचाने के लिए मीम्स और वीडियो के जरिए बात को सरल बनाना जरूरी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि वह AAP के IT मीडिया प्रमुख अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे।
कुछ विश्लेषणों में दावा किया गया है कि हास्य और व्यंग्य के पीछे CJP विपक्षी राजनीतिक नैरेटिव को आगे बढ़ाता है, जिसमें न्यायपालिका, चुनाव आयोग, कॉर्पोरेट जगत, मीडिया और दल बदलने वाले नेताओं को निशाना बनाया जाता है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान के कॉन्ग्रेस और अन्य बीजेपी विरोधी दलों के प्रति सहानुभूति दिखाने की चर्चाएँ भी होती रही हैं।
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)


