Monday, April 22, 2024
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3 महीने का समय होने के बावजूद ट्विटर, फेसबुक ने नहीं किया नियमों का पालन, अब हो सकती है सख्त कार्रवाई

"यदि सोशल मीडिया कंपनियाँ नियमों का पालन नहीं करेंगी, तो वे बिचौलियों के रूप में अपनी स्थिति और सुरक्षा खो सकती हैं। साथ ही भारत के मौजूदा कानूनों के अनुसार आपराधिक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी हो सकती हैं।"

ट्विटर, फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 26 मई 2021 तक की समय सीमा मिलने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने में अब तक असफल रहे। ऐसे में आगे इनके बने रहने पर इनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

मालूम हो कि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एवं इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने इस साल 25 फरवरी को सभी सोशल मीडिया कंपनियों को नए नियमों का पालन करने के लिए 3 महीने का समय दिया था। 

इसमें भारत सरकार ने कंपनियों को इंटरमीडिएट्री गाइडलाइन एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड रूल्स, 2021 के तहत नियमों का पालन करने के लिए कहा था। लेकिन कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसा करने में असफल रहे।

शीर्ष सूत्रों का कहना है, “यदि सोशल मीडिया कंपनियाँ नियमों का पालन नहीं करेंगी, तो वे बिचौलियों के रूप में अपनी स्थिति और सुरक्षा खो सकती हैं। साथ ही भारत के मौजूदा कानूनों के अनुसार आपराधिक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी हो सकती हैं।”

जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कंपनियों को दिशा-निर्देश देते हुए कहा था कि ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म देश में थ्री-टायर सेल्फ-रेगुलेट्री फ्रेम वर्क के तहत तीन अफसर (resident grievance officer, chief compliance officer और nodal contact person) तैनात करें, जिनकी हर मामले में जवाबदेही हो, साथ में किसी शिकायत का तुरंत निपटान किया जा सके। इसके अलावा आपत्तिजनक कंटेंट की निगरानी और उस सामग्री को हटाने जैसे नियम भी लागू करने को कहे गए थे।

इन सबके लिए केंद्र सरकार ने देश में काम कर रहीं सभी सोशल मीडिया कंपनियों को 26 मई तक का समय दिया था, लेकिन अभी तक किसी भी कंपनी ने इन नियमों का पालन नहीं किया है। सिर्फ भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू ने ही सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार आवश्यक नियुक्तियाँ की।

एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर ये भी कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स के लिए ये जरूरी नहीं था कि वे मंत्रालय को नियुक्तियों के संबंध में सूचित करें। वे अपने वेबसाइट पर भी विवरण प्रस्तुत कर सकते थे। बस उन्हें नियमों का किसी तरह पालन करना है। अधिकारी के मुताबिक नियमों को 25 फरवरी को अधिसूचित किया गया था और सोशल मीडिया कंपनियों को इसे लागू करने के लिए 3 माह का समय दिया गया था।

फेकबुक का बयान

सरकार द्वारा तय की गई डेडलाइन से एक दिन पहले फेसबुक ने मंगलवार (25 मई) को इस संबंध में अपना बयान दिया। फेसबुक ने कहा “हमारा लक्ष्य आईटी नियमों के प्रावधानों का पालन करना है और कुछ ऐसे मुद्दों पर चर्चा करना जारी रखना है जिनके लिए सरकार के साथ अधिक जुड़ाव की आवश्यकता है। आईटी नियमों के अनुसार, हम परिचालन प्रक्रियाओं को लागू करने और दक्षता में सुधार करने के लिए काम कर रहे हैं। हमारा प्लेटफॉर्म लोगों को स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से खुद को व्यक्त करने की क्षमता के लिए प्रतिबद्ध है।”

बता दें कि बड़ी तकनीकी कंपनी खासकर ट्विटर से अक्सर भारत सरकार का टकराव होता रहा है। खासकर तब जब ट्विटर मनमाने ढंग से बिना कोई वजह दिए किसी का अकॉउंट निलंबित कर दे और गलत सूचनाओं को बिना किसी कार्रवाई के बढ़ाता रहे। हाल ही में ट्विटर को दिल्ली पुलिस ने भाजपा नेताओं के ट्वीट पर मैनिपुलेटिड मीडिया के लेबल लगाने पर तलब किया था। पुलिस जानना चाहती है कि किस आधार पर ऐसा किया गया। वहीं सरकार भी ट्विटर की ऐसी हरकतों से नाखुश है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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