Homeसोशल ट्रेंड'दो पैसे की प्याली गई, पर कुत्ते की जात पहचानी गई': कुमार विश्वास का...

‘दो पैसे की प्याली गई, पर कुत्ते की जात पहचानी गई’: कुमार विश्वास का ट्वीट, मुनव्वर राना को क्यों पड़ रही गाली?

"फिर तो आज़ाद कश्मीर की माँग करने और वादी में बेगुनाहों का खून बहाने वाले भी आतंकवादी नहीं हैं। राना साहब, मजबूर कर रहे हैं आप कि मैं अपनी लाइब्रेरी से आपकी किताबें हटा दूँ। बाज़ आ जाइए!"

देश में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो तालिबान का महिमामंडन कर रहे हैं। कई मुस्लिम धर्मगुरु और नेता तालिबान की प्रशंसा करते फूले नहीं समा रहे हैं, ऐसे में लोकप्रिय कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट करके ऐसे लोगों को लताड़ लगाई है।

विश्वास ने ट्वीट करके कहा, “ज्यादा दिमाग न लगाइए। अगर पड़ोस के घर में मची अफरा-तफरी के कारण, जिंदगी भर आपसे इज्जत पाने वाले और आपके घर में रह रहे, बदबूदार सोच से भरे किसी जाहिल शख्स का पर्दाफाश हो रहा है तो शोक नहीं, शुक्र मनाइए कि दो पैसे की प्याली गई (वो भी पड़ोसियों की), पर कुत्ते की जात पहचानी गई।”

हालाँकि विश्वास ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन सोशल मीडिया यूजर इसी बहाने शायर मुनव्वर राना को निशाने पर ले रहे हैं। कई यूजर्स का मानना है कि कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए मुनव्वर राना के लिए ही यह बात कही है।

मुनव्वर राना ने कहा था कि तालिबानी आतंकी नहीं हैं बल्कि उन्होंने अपने मुल्क को आजाद कराया था। इस पर गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी अपनी आपत्ति जताई थी और कहा था, “फिर तो आज़ाद कश्मीर की माँग करने और वादी में बेगुनाहों का खून बहाने वाले भी आतंकवादी नहीं हैं। राना साहब, मजबूर कर रहे हैं आप कि मैं अपनी लाइब्रेरी से आपकी किताबें हटा दूँ। बाज़ आ जाइए!”

ज्ञात हो कि ‘न्यूज नेशन’ चैनल पर दीपक चौरसिया से बात करते हुए राना ने तालिबान का महिमामंडन किया था और कहा था कि तालिबान ने भारतीयों के खिलाफ कोई खराब कदम नहीं उठाया और उन्हें जाने के लिए नहीं कहा, लेकिन हालात बिगड़ने पर लोग आ रहे हैं। मुनव्वर राना ने कहा कि तालिबान के जुल्म को लेकर हमें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन अफगानिस्तान के हजार वर्ष का इतिहास कहता है कि हिंदुस्तान ने उनसे हमेशा मोहब्बत की है। यहाँ तक कि उन्होंने भगवान वाल्मीकि की तुलना तालिबान से कर डाली और कहा कि वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है। इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -