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सवाल- इस्लाम की नजर में मूर्ति पूजा और बच्ची के रेप में से बड़ा गुनाह क्या? जवाब: मूर्ति पूजा… वायरल Video में जो बता रहा कल का हाफिज, मुफ्ती भी वही बताते हैं

मुस्लिम व्यक्ति बताता है कि इस्लाम की नजर में एक तरफ अगर रेप हो रहा हो और एक तरफ मूर्ति पूजा हो रही हो तो इस्लाम मूर्ति पूजा को ज्यादा गलत मानता है। आगे मुस्लिम व्यक्ति इसका कारण बताते हुए कहता है कि ऐसा इसलिए होता है कि अल्लाह ने कहा है...।

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम व्यक्ति की वीडियो वायरल है। इस वीडियो में वह पत्रकार को बता रहा है कि इस्लाम में रेप इतना बड़ा गुनाह नहीं है, जितना बड़ा गुनाह मूर्ति पूजा है। अगर एक शख्स रेप करे तो अल्लाह उसे माफ कर देगा, मगर अगर कोई मूर्ति पूजा करके शिर्क करे तो अल्लाह उसे माफ नहीं करेगा।

इस वीडियो को देखने के बाद सवाल उठने लगे कि ये व्यक्ति किस तरह की तालीम दे रहा है। लोग पूछने लगे कि क्या इस्लाम का सच यही है कि उनके लिए रेप गुनाह नहीं है।

हमने इस मुस्लिम व्यक्ति की ओरिजनल वीडियो खोजी तो पता चला कि वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का नाम एहसान है, और उसका दावा है कि वह ‘हाफिज’ रह चुका है। ‘द राष्ट्रनीति’ के पत्रकार सुमित तिवारी इनसे वक्फ पर राय लेने गए थे। जहाँ बातों-बातों में इन्होंने इस्लाम की आलोचना करते हुए ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस्लामी तालीम के साथ बाकी पढ़ाई भी जरूरी है ताकि सही-गलत पता चले।

वीडियो में 9:00 मिनट से 9:50 तक में सुन सकते हैं कि मुस्लिम व्यक्ति बताता है कि इस्लाम की नजर में एक तरफ अगर रेप हो रहा हो और एक तरफ मूर्ति पूजा हो रही हो तो इस्लाम मूर्ति पूजा को ज्यादा गलत मानता है। आगे मुस्लिम व्यक्ति इसका कारण बताते हुए कहता है कि ऐसा इसलिए होता है कि अल्लाह ने कहा है- “अगर एक तरफ शख्स ने कोई भी गुनाह किया हो और वो माफी माँग ले तो मैं माफ कर दूँगा, लेकिन अगर शिर्क किया हो, जैसे दूसरे को खुदा मानता हो, तो वो ज्यादा बड़ा गुनाह है।”

इस वीडियो में ‘हाफिज’ ने कई और मुद्दों पर भी बात की है। उन्होंने जगह-जगह पर इस्लाम की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा सिखाया गया कि जितने बच्चे हो जाएँ ठीक, लेकिन जब उनके 8 से 6 बच्चे हुए और उन्होंने अपनी बीवी की हालत देखी तो उन्हें पता चला कि बच्चे करने से कुछ नहीं होता, उन्हें पालने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने वक्फ बोर्ड को लेकर भी कहा कि उन्हें आज तक इससे कोई फायदा नहीं हुआ।

रही बात गुनाह वाले बयान की तो गौरतलब हो कि कुछ दिन पहले ऐसा ही सवाल दारुल उलूम के डायरेक्टर व इस्लामी स्कॉलर डॉक्टर मुफ्ती यासिर नदीम अल वजीदी से भी किया गया था। पूछा गया था कि मूर्ति पूजा ज्यादा बड़ा गुनाह या रेप। इस पर उस मुफ्ती ने बिन दो मिनट भी सोचे ये कहा था कि बलात्कार से बड़ा गुनाह मूर्ति पूजा है। इंसानी नजरिए से रेप बड़ा गुनाह लग सकता है, लेकिन हकीकत में मूर्ति पूजा गुनाह है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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