अपने जिहादी लड़ाकों को वर्क फ्रॉम होम का फरमान सुनाने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने कोरोना महामारी को मूर्ति पूजा करने वाले देशों के लिए अल्लाह का जवाब बताया है। आईएसआईएस ने खुदा से अपील की है कि वह नास्तिकों पर कोरोना वायरस का कहर और ज्यादा बढ़ाए।
इंडोनेशिया से 579 मामले और 49 मौतें, बहरीन से क्रमशः 339 और 2, सऊदी अरबिया से 562 कोरोना मामले और शून्य मौतें फिलहाल तक, तथा इराक से 266 मामले सामने आए हैं जिनमें से 23 की मौत हो चुकी है। इसी प्रकार क़तर से 494 कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि की खबरें आईं हैं, जबकि अल्जीरिया से अब तक 201 पॉजिटिव मामले और 17 मौतों की खबर आ चुकी है।
"वाह कैफ जी वाह, बहुत खूब आप में और गैर इमान वालों में क्या फर्क है बता सकते हैं? अरे आपको चाहिए अपने परिवार को बोलते अल्लाह के सामने सजदा करो, दुआ माँगो, रो-रोकर दुआ माँगो और सुन्नत पे चलो। अल्लाह की बात छोड़ बजाय फेकू साहब की मान रहे हो, वाह।"
केवल इतिहासकार नहीं, बल्कि 'मस्जिद' के भीतर रखा गया 11वीं शताब्दी का शिलालेख भी इस बात को संदर्भित करता है कि पहले ये 'मस्जिद' इंद्रनारायण का मंदिर था। लेकिन राज्य सरकार की तुष्टिकरण वाली ऐसी क्या मजबूरी कि वो सच बोलने से बचती है?
कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए लोगों से एक जगह जुटने को नहीं कहा जा रहा। लेकिन, तौहीद जमात जैसे कट्टरपंथी संगठनों को इन सबसे फर्क नहीं पड़ता। सीएए विरोध में चेन्नई हाई कोर्ट के पास प्रदर्शन कर उन्होंने यह बता दिया है।
“इस चरमपंथी समूह के विचारों से डर फैलता है जिससे लोग डरते हैं और घबराते हैं। अगर हम डरते हैं और घबराते हैं, तो वे जीत जाते हैं। हम इस धमकी का जवाब नहीं देंगे।”
“मैं वहाँ मौजूद नहीं था। मैं खुद अपने बच्चों और परिवार को बचाने की कोशिश कर रहा था। यह बहुत दुख की बात है कि उन्होंने (अंकित के माता-पिता) अपने बच्चे को खो दिया, लेकिन वे जो चाहें कह सकते हैं। मुझे इससे कोई लेना-देना नहीं है। ये आरोप झूठे हैं और इसके लिए मुझे फ्रेम करना गलत है।”
अलीगढ़ में भीम आर्मी, पीएफआई और एएमयू के एक छात्र संगठन के लोगों के बीच बैठक हुई। इसके बाद हिंसा भड़की। ठीक उसी पैटर्न पर दिल्ली में हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया गया है। इससे पहले दिल्ली के जामिया और यूपी में हुई हिंसा में भी पीएफआई की संलिप्तता सामने आई थी।