ये मुस्लिम भीड़ कभी स्वास्थ्यकर्मियों पर थूककर तो कभी उनके साथ मारपीट करके अपने जाहिलपने का लगातार उदहारण पेश कर रही हैं। हालत ये हो गई है कि ये लोग जिन्हें प्रशासन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने की कोशिशों में जुटा है, वे लोग उनके लिए सिरदर्दी का सबब बन गए हैं। इनके बेहूदे रवैये से इस समय न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि पुलिस प्रशासन भी त्रस्त है।
कैफ ने अपनी पत्नी के साथ 9 मिनट के लिए मोमबत्ती जलाते हुए साफ किया कि वे ये सब उन योद्धाओं के लिए कर रहे हैं, जो हमारी जान बचाने के लिए अपनी जान को खतरे में डाले हुए हैं। मगर, इस्लामी कट्टरपंथियों को इससे क्या? वे तो यहाँ भी कैफ को मजहब का पाठ पढ़ाने लगे, अपशब्द बोलने लगे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुदीब मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को फॉलो कर रखा है, वो उसके भाषण को देखता और उसे लाइक और शेयर भी करता है। पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे पोस्ट करना उसकी आदतों में शुमार है, जो अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है।
आलीम ने NDTV के ट्वीट पर अपनी इच्छा जाहिर करते हुए पूछा - इंडियन FM किधर है? लेकिन, जैसे ही अन्य यूजर्स ने उसे इस पर घेरना शुरू किया और उसके ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल होना शुरू हुआ, उसने फौरन अपना अकॉउंट डिएक्टिवेट कर दिया और मुजरिमों की तरह ट्विटर से फरार हो गया।
'द हिन्दू' ने एक कार्टून पब्लिश किया, जिसमें कोरोना वायरस को हाथों में बन्दूक थामे हुए पृथ्वी ग्रह को डराते हुए बताया गया है कि इसने पूरी पृथ्वी को आतंकित किया है।
अपने जिहादी लड़ाकों को वर्क फ्रॉम होम का फरमान सुनाने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने कोरोना महामारी को मूर्ति पूजा करने वाले देशों के लिए अल्लाह का जवाब बताया है। आईएसआईएस ने खुदा से अपील की है कि वह नास्तिकों पर कोरोना वायरस का कहर और ज्यादा बढ़ाए।
इंडोनेशिया से 579 मामले और 49 मौतें, बहरीन से क्रमशः 339 और 2, सऊदी अरबिया से 562 कोरोना मामले और शून्य मौतें फिलहाल तक, तथा इराक से 266 मामले सामने आए हैं जिनमें से 23 की मौत हो चुकी है। इसी प्रकार क़तर से 494 कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि की खबरें आईं हैं, जबकि अल्जीरिया से अब तक 201 पॉजिटिव मामले और 17 मौतों की खबर आ चुकी है।
"वाह कैफ जी वाह, बहुत खूब आप में और गैर इमान वालों में क्या फर्क है बता सकते हैं? अरे आपको चाहिए अपने परिवार को बोलते अल्लाह के सामने सजदा करो, दुआ माँगो, रो-रोकर दुआ माँगो और सुन्नत पे चलो। अल्लाह की बात छोड़ बजाय फेकू साहब की मान रहे हो, वाह।"
केवल इतिहासकार नहीं, बल्कि 'मस्जिद' के भीतर रखा गया 11वीं शताब्दी का शिलालेख भी इस बात को संदर्भित करता है कि पहले ये 'मस्जिद' इंद्रनारायण का मंदिर था। लेकिन राज्य सरकार की तुष्टिकरण वाली ऐसी क्या मजबूरी कि वो सच बोलने से बचती है?