उन्होंने दावा किया है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के आदेश के बाद उनका एनकाउंटर करने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन भारी जनसमर्थन के कारण ये साजिश विफल हो गई।
"ढोंग और आस्था में यही फर्क है। प्रियंका गाँधी को इतना नहीं पता कि आरती पहले भगवान को दी जाती है, फिर इंसान लेते हैं। इसलिए इन्हें चुनावी हिंदू कहा जाता है।"
वायनाड में जनजातीय समाज के रमन नाम्बि का सिर काट कर उनके छोटे से बच्चे के सामने प्रदर्शित किया गया। उसी वायनाड में प्रियंका गाँधी कहती हैं कि अहिंसा से आज़ादी मिली। क्या ये ऐसे क्रांतिकारियों का अपमान नहीं?