Tuesday, April 13, 2021

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बाबा रामदेव

मात्र 4 महीने में कोरोनिल के ₹250 करोड़ के 25 लाख किट बिके: भारत ही नहीं, दुनिया भर में है जबरदस्त माँग

अपने लॉन्च से अब तक मात्र 4 महीनों में बाबा रामदेव की 'पतंजलि आयुर्वेद' की 'कोरोनिल' की अब तक 25 लाख से भी ज्यादा किट्स बिक चुकी हैं।

IPL-13 का टाइटल स्पॉन्सर बन सकती है बाबा रामदेव की पतंजलि, Vivo के निकाले जाने के बाद आगे आई कंपनी

BCCI ने IPL की स्पॉन्सरशिप के लिए Vivo से करार ख़त्म कर दिया। अब बाबा रामदेव की पतंजलि मुख्य स्पॉन्सर के लिए आगे आई है और...

आतंकियों की तरह FIR, क्या आयुर्वेद पर काम करना गुनाह है? – बाबा रामदेव ने पूछा- ‘सिर्फ कोट-टाई वाले करेंगे रिसर्च?’

कोरोनिल पर दुष्प्रचार और दर्ज किए गए कई FIR पर बोलते हुए बाबा रामदेव ने पूछा कि कोट-टाई वालों को रिसर्च का हक़ है, धोती वालों को नहीं है?

पतंजलि की कोरोनिल को मिला सशर्त लाइसेंस: इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में बिकेगी, नहीं होगा कोरोना का उल्लेख

पतंजलि द्वारा निर्मित कोरोनिल को आयुष मंत्रालय ने बतौर इम्युनिटी बूस्टर अप्रूव करते हुए लाइसेंस दे दिया। मंत्रालय ने कोरोनिल को कोरोना...

कोरोनिल पर बवाल के बाद Fair & Lovely पर उठे सवाल, कंपनी ने कहा- बदला जाएगा 45 साल पुराने प्रॉडक्ट का नाम

संगठनों का आरोप था कि क्रीम में गोरापन शब्द को जिस तरह से इस्तेमाल किया जाता है उससे ये प्रतीत होता है कि सिर्फ गोरी महिलाएँ ही खूबसूरत होती हैं।

दर्द कोरोनिल नहीं, आयुर्वेद है: वामपंथी गैंग को चाहिए गोरों का सर्टिफिकेट, रामदेव से इनका गुर्दा छिल जाता है

बाबा रामदेव ने कोरोनिल क्या लॉन्च की, वामपंथी गैंग बिना सबूत घृणा फैलाने में लग गया। इसकी वजह क्या है?

क्या वाकई ‘कोरोनिल’ बेचने के​ लिए रामदेव को प्रचार की जरूरत है?

शुक्र मनाइए कि रामदेव बनिया बन गए तो कई मीडिया हाउस चल रहे हैं। जरा मीडिया कंपनी के मालिकों से पूछिए कि नोटबंदी के बाद रामदेव के विज्ञापन का सहारा न होता तो उनका क्या हुआ होता?

जानिए क्या है पतंजलि की दिव्य कोरोनिल टैबलेट जो कर रही है कोरोना खत्म करने का दावा

पतंजली ने कहा कि कोरोना किट, केवल ₹545 में उपलब्ध कराया जाएगा। रामदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस दवा ने 3-7 दिनों के भीतर '100% रिकवरी रेट' दिखाया है।

अश्वगंधा का अश्वमेध: कोरोना की आयुर्वेदिक दवा बनाने के पतंजलि के दावे में कितना दम?

पतंजलि ने कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा का निर्माण किया है। इसका क्लीनिकल ट्रायल अंतिम चरण में है।

हलाल का हल्ला: आयुर्वेद व ऋषि-परंपरा को इस्लामी देशों ने अपनाया, समझौता उन्होंने किया, जीत हमारी हुई

पतंजलि को हलाल सर्टिफिकेट मिला लेकिन क्या कंपनी में कोई बदलाव किया गया? नहीं। तो फायदा किसे हुआ और समझौता किसे करना पड़ा? समझिए!

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