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भारतीय संस्कृति

विवाह- भारतीय संस्कृति की आत्मा… लिव-इन रिश्ते सिर्फ ‘आकर्षण’ पर टिके : युवा दोनों के बीच समझें अंतर, दूर रहें अकेलेपन और डिप्रेशन से

आज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप वास्तव में आधुनिकता का प्रतीक है या फिर यह हमारे समाज और संस्कृति को खोखला करने वाली एक सोच है?

आज जो म्यांमार गृहयुद्ध, तख्तापलट और नार्को-टेरिरिज्म में फँसा, वहाँ 1000 साल पहले था समृद्ध बागान साम्राज्य: बौद्ध राजवंश पर थी भारतीय संस्कृति की...

म्यांमार कभी भारतीय संस्कृति से प्रेरित समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से जीवंत सभ्यता था। यहाँ प्राकृतिक दृश्य और सुनहरे मंदिरों की भरमार थी।

जब माँ कौशकी ने किया असुरों का संहार, माँ काली ने दैत्यों का खून पिया… दिल्ली के कालिका मंदिर का 3000 वर्ष पुराना है...

दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर में देवी काली को कालिका नाम से पूजा जाता है। माँ कालिका को शक्ति और समय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मंदिर का नाम भी कालकाजी इसी कारण पड़ा है।

मोड़ पर फँसा बलभद्र का रथ तो जमा हो गए लोग… भगदड़ मचने से 500+ श्रद्धालु घायल: भीड़ और नमी ने भी बिगाड़ी तबियत,...

ओडिशा के पुरी मे भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान बलभद्र रथ अटकने से एक जगह भीड इकट्ठा हो गई, जिससे 500 से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए।

12 दिन की यात्रा पर चले भगवान जगन्नाथ, अहमदाबाद में अमित शाह ने की मंगला आरती: रथयात्रा की सुरक्षा में लगे 10000 पुलिसकर्मी, कृष्ण-सुभद्रा-बलराम...

ओडिशा के पुरी से 27 जून 2025 को भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली गई। अहमदाबाद में गृहमंत्री अमित शाह ने श्री जगन्नाथ मंदिर पहुँचकर मंगला आरती की।

जानिए ‘एक चुटकी सिंदूर’ का महत्व, जो भारत ने पाकिस्तान को समझाया: हजारों वर्षों से सुहागिनों का है श्रृंगार, हनुमान जी को भी है...

स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में देवी पूजा के संदर्भ में सिंदूर का उल्लेख है। माँ पार्वती और माँ दुर्गा के लिए यह दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।

हरिद्वार का औरंगजेबपुर बना शिवाजी नगर, मियांवाला हुआ रामवाला… उत्तराखंड में 17 जगहों के बदले नाम: बोले CM धामी- भारतीय संस्कृति-विरासत के आधार पर...

देहरादून जिले में वर्तमान स्थान मियांवाला का नाम रामजीवाला, पीरवाला का नाम केसरी नगर, चांदपुर खुर्द का नाम पृथ्वीराज नगर और अब्दुल्लापुर का नाम अब दक्षनगर किया गया है।

सृष्टि के पहले दिन से काल की गणना, चंद्र और सूर्य ग्रहण की अग्रिम जानकारी: दुनिया के सबसे प्राचीन और सटीक कैलेंडर ‘विक्रम संवत’...

सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक महान खगोलविद वाराह मिहिर ने इस कैलेंडर की शुरुआत की थी और उसका नाम विक्रम संवत रखा था।

अर्ध कुंभ, कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ: जानिए क्या है अंतर, कैसे होती है गणना… क्यों इस बार प्रयागराज में लग रहा है महाकुंभ

प्रयागराज में माघ अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं और गुरु मेष राशि में होता है। इस खगोलीय गणना का सटीक पालन आज भी किया जाता है।

दुनिया के लिए अबूझ, पर हमारे पुराणों में दर्ज है सब कुछः जानिए क्या है महाकुंभ का खगोलीय महत्व, कितनी प्राचीन यह सनातनी परंपरा;...

महाकुंभ का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाकाव्यों में मिलता है। श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण और महाभारत में समुद्र मंथन की कथा को विस्तार से बताया गया है।

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