महंत और सरपंच द्वारा मिली सामान्य सूचना के आधार पर पुलिस जाँच में जुट गई हैं। सरपंच ने बताया की महंत का पोस्टमॉर्टम हो गया है। उनका अंतिम संस्कार गाँव में ही किया जाएगा।
इस क़ानून के तहत, जो धार्मिक स्थल आज़ादी के समय जिस संप्रदाय का था वो आज और भविष्य में, भी उसी का रहेगा। जैसे किसी भी मस्जिद को मंदिर में नहीं बदला जा सकता है।