विषय: महागठबंधन

राबड़ी - नीतीश

‘पलटू चाचा’ के लिए RJD का पिघला मन, राबड़ी ने कहा- महागठबंधन में आते हैं तो स्वागत है

बिहार की सियासत गज़ब के मोड़ पर है, एक तरफ जहाँ आरजेडी नीतीश को एक बार फिर से महागठबंधन में लेने को बेताब है क्योंकि वह नरेंद्र मोदी सरकार से नीतीश के मन में पैदा हुए असंतोष को भुनाना चाहती है। लोकसभा के परिणामों से आरजेडी जान चुकी है कि नीतीश के कंधे पर सवार होकर शायद पार्टी को एक बार फिर बिहार की सत्ता मिल सकती है।
अखिलेश यादव और मायावती

…तो अच्छा ही है कि अलग-अलग होकर चुनाव लड़ा जाए: मायावती ने लगाया महागठबंधन पर ब्रेक

बसपा सुप्रीमो का कहना है कि उनका रिश्ता सिर्फ़ राजनैतिक नहीं था, ये आगे भी इसी तरह का रहेगा। लेकिन, इन अच्छे संबंधों के बावजूद वो लोकसभा चुनावों में आए नतीजों को भूल नहीं सकती हैं। इसी वजह से उन्हें अपने फैसले पर दोबारा सोचना पड़ा।
अखिलेश-मायावती और डिंपल यादव

पत्नी को भी नहीं जिता पाए ‘टोंटी-चोर’, UP में बुआ-बबुआ का गठबंधन टूटा, अकेले लड़ेगी BSP

बीजेपी अपने दम पर पूरे यूपी में 50% के करीब वोट और 64 सीटों पर जीत हासिल की तो वहीं सपा-बसपा मिलकर 15 सीटें और 40 फीसदी के आसपास वोट शेयर हासिल कर पाई। कुल मिलाकर पूरी तरह फेल हो गया उनका जातीय समीकरण। यही अब गठबंधन में टूट का कारण बन कर उभरा है।
विपक्ष में हलचल

EVM को लेकर विपक्ष की नौटंकी जारी, चुनाव आयोग से मिलकर रखेंगे अपनी बात

विपक्षी दलों ने मतगणना के समय किसी भी मतदान केंद्र पर गड़बड़ी पाए जाने की स्थिति में देशभर में सभी विधानसभा क्षेत्रों में EVM के आँकड़ों के साथ VVPAT मशीन की पर्चियों से मिलान की माँग की थी।
उपेंद्र कुशवाहा

‘सड़कों पर बहेगा खून अगर मनमुताबिक चुनाव परिणाम न आए, समर्थक हथियार उठाने को तैयार’

एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
विपक्ष महागठबंधन

मिशन खिचड़ी सरकार: पवार ने दिया नायडू को झटका, मायावती नहीं मिलेंगी सोनिया से

शरद पवार ने चंद्रबाबू नायडू से बैठक के दौरान उन्हें झटका दिया। नायडू ने राहुल गाँधी, सीताराम येचुरी, अरविन्द केजरीवाल और अभिसेक सिंघवी से मुलाक़ात की है। वह सोनिया और ममता से भी मिलेंगे।उधर मायावती ने सोनिया गाँधी से मुलाक़ात रद्द कर दी है।
राहुल गाँधी, चंद्रबाबू नायडू

चुनाव पूरे होने के पहले ही चंद्रबाबू सरकार बनाने में जुटे, केजरीवाल और राहुल से मुलाकात

कॉन्ग्रेस भी तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने के लिए विपक्ष की पार्टियों को एकजुट करने में जुट गई है। इसके लिए कॉन्ग्रेस ने नेताओं से मिलने की क़वायद भी शुरू कर दी है। शुक्रवार (17 मई) को कॉन्ग्रेस ने कहा था कि वो एक प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए प्रतिबद्ध है।
सपा-बसपा कारकर्ता लड़ाई

गाज़ीपुर में माया-अखिलेश की रैली में भिड़े SP-BSP कार्यकर्ता, अफ़ज़ल अंसारी है उम्मीदवार

ऐसे में, इस सीट को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। वाराणसी से ख़ुद पीएम मोदी मैदान में हैं और काशी से सटी गाज़ीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनोज सिन्हा की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है।
केसीआर, स्टालिन

विपक्षी एकता ने नए सूत्रधार बन कर उभरना चाहते हैं KCR, खिचड़ी सरकार के लिए प्रयास तेज़

दोनों प्रमुख द्रविड़ नेताओं की मृत्यु, लालू के जेल में होने, मुलायम को बेटे द्वारा किनारे किए जाने, शरद पवार के चुनाव लड़ने से इनकार करने, नायडू-पटनायक के अपने गढ़ बचाने में व्यस्त रहने और कॉन्ग्रेस की मज़बूरी के कारण केसीआर एक बड़े विपक्षी सूत्रधार बन कर उभरना चाह रहे हैं।
मेनका गाँधी

महागठबंधन प्रत्याशी के समर्थकों ने मेनका गाँधी के समर्थकों को पीटा, दबंगई

सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स ने कहा कि रात में घटना की सूचना मिली है। मेनका समर्थक शिवकुमार सिंह के साथ प्रचार में लगे लोगों के साथ चंद्रभद्र सिंह के समर्थकों ने मारपीट की, जिसमें मेनका गाँधी के समर्थकों को काफी चोटें आईं हैं। मामले की जाँच करवाई जा रही है।
रवीश कुमार

रवीश कुमार SP-BSP के मंच पर कौन सा ‘कठिन सवाल’ पूछने गए थे? कौन जात हो वाला?

पिछले साल रवीश कुमार द्वारा संचालित एक कार्यक्रम में, सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा था कि उन्हें उस पत्रकार की हत्या नहीं करने का पछतावा है जिसने उनकी आलोचना की थी। रवीश कुमार ने अखिलेश यादव की सहनशीलता की प्रशंसा करते हुए उस शो की शुरुआत की थी।
बसपा के मतदाता वर्ग ने महागठबंधन को अपने साथ छलावा माना है

माया समर्थक SP-BSP गठबंधन से नाराज भी, अनजान भी, दे रहे हैं BJP को वोट

जमीन पर मतदाताओं तक महागठबंधन की खबर पहुँचा पाने में बसपा कार्यकर्ता विफल रहे हैं। एक बड़ा मतदाता वर्ग हाथी न ढूँढ़ पाने के भ्रम में कमल का बटन दबा आ रहे हैं।

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