ये सवाल उठता है कि तब पुलिस और प्रशासन क्या कर रहा था, जब ये भीड़ जुटनी शुरू हुई। क्या पुलिस देखती रही और भीड़ जुटती रही? क्या महाराष्ट्र सरकार ने न्यूज़ चैनल से सम्पर्क कर के बताया कि स्पेशल ट्रेनें नहीं चलेंगी?
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार सबका ख्याल रख रही है और राज्य पूरे देश को कोरोना से लड़ने की नई दिशा दिखा रहा है। अमित शाह ने भी उद्धव ठाकरे से फोन पर बात करके स्थिति का जायजा लिया।
मजदूर घर जाने के लिए जमा हुए हैं तो इनके हाथों में थैले या बैग वगैरह क्यों नहीं हैं? भीड़ मस्जिद के पास ही क्यों जमा हुई और अल्लाह का नाम लेकर समझाने के पीछे क्या तुक है? महाराष्ट्र में 30 अप्रैल तक का लॉकडाउन पहले से ही घोषित था तो आज हंगामा क्यों हो रहा है?
लोगों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना की, जो तीन दलों की संयुक्त सरकार चला रहे हैं। उद्धव के बारे में जिस तरह से सोशल मीडिया के सेलेब्रिटीज ने कसीदे पढ़े हैं, उसके बाद लोग उन्हें मजाक में 'यूनेस्को सर्टिफाइड बेस्ट सीएम' कहने लगे हैं।
ट्रैफिक पुलिस, बेस्ट के बस कर्मचारियों और बीएमसी के कर्मचारियों के बीच 12,000 से भी अधिक मास्क और सैनिटाइजर बाँटे। काफ़ी सारे अस्पतालों के डॉक्टरों को भी भोजन मुहैया कराने का काम संघ ने किया है। रोगियों के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की गई है।
नेहा कुमारी नामक महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने बच्चे को लेकर अपील की थी, जिसके बाद उन तक सहायता पहुँचाई गई। नेहा का एक 3.5 वर्षीय बच्चा है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है। उसे कई प्रकार की फ़ूड एलर्जी भी है।
थोड़ी आगे जाकर नईम अपना संतुलन खो बैठा और धुरत के साथ बाइक से गिर गया। बाइक भी दूर जा गिरी। इस वाकये में धुरत के हाथ, पैर और कंधे में चोटें आईं। बाद में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया और मौक़े पर ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा नईम को गिरफ्तार कर लिया गया।
देश में कोरोना के मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच ईसाई कार्डिनल ने मुंबई के सभी चर्च पादरियों से अपील की है कि वह कोरोना से मरने वाले लोगों के शवों को दफनाएँ नहीं बल्कि उनकी डेडबॉडी का अंतिम संस्कार कराएँ।
लाश को प्लास्टिक में पैक करके फिर दफनाना उनको डिकम्पोज होने में देरी पैदा करता है और इसीलिए बीमारियों के फैलने का ख़तरा बना रहता है। साथ ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। श्मशान का कर्मचारी मास्क और ग्लव्स इत्यादि का इस्तेमाल कर के पूरी सावधानी के साथ लाश का अंतिम संस्कार करेगा।