मुस्लिम पक्षकार ने दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है।
मंदिरों की संपत्ति तो पहले ही सरकारी कब्जे में है। सबसे ज्यादा ज़मीनों वाले चर्च और वक्फ बोर्ड को तो सरकारी नियंत्रण से मुक्त रखा गया है, लेकिन सरकार मंदिरों की जमीनें समय-समय पर, किसी न किसी बहाने से बेचती रही है।
बीते महीने यूपी सरकार ने रामलला के फंड में इजाफा किया था। यह जान आप हैरत में पड़ जाएॅंगे कि 3,800 रुपए की मामूली बढ़ोतरी 1992 के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। मुख्य पुजारी के वेतन में हजार और अन्य कर्मचारियों का वेतन 500 रुपए बढ़ाया गया है।
धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष सिर्फ़ यहाँ राम का जन्म होने की बात करते हैं, लेकिन उनकी अर्जी में कहीं भी उस क्षेत्र की बाउंड्री का जिक्र नहीं है। पूरी विवादित जमीन जन्मस्थान नहीं हो सकती। कुछ तो निश्चित स्थान होगा। पूरा क्षेत्र जन्मस्थान नहीं हो सकता।
"1985 में राम जन्मभूमि न्यास बना और 1989 में केस दाखिल किया गया। इसके बाद सोची समझी नीति के तहत कार सेवकों का आंदोलन चला। विश्व हिंदू परिषद ने माहौल बनाया जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।"
"जब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा हो, सब पक्ष अपनी बात रख रहे हों, सुप्रीम कोर्ट लगातार समय निकालकर बातों को सुन रही हो, तब मैं हैरान हूँ ये बयान बहादुर कहाँ से आ गए। हमारा सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा होना चाहिए। बाबा साहब अम्बेडकर ने जो संविधान दिया है उस पर भरोसा होना चाहिए...."
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या मामले की सुनवाई बहुत आगे पहुॅंच गई है। यदि पक्ष मध्यस्थता के जरिए मामला सुलझाने के इच्छुक हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कलीफुल्ला की अगुवाई वाली मध्यस्थता पैनल के समक्ष हो रही सुनवाई गोपनीय रहेगी।
सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को केवल इस बात का सबूत चाहिए कि अयोध्या के किस खास जगह पर राम का जन्म हुआ था। वरना इकबाल के इमाम-ए-हिंद को वे भी याद करते हैं। कृपानिधान तो वाजिद अली शाह के भी राम ही थे। लेकिन, किसी ने न लिखा, न गाया। राम किस प्लॉट में पैदा हुए थे?
बाबरी मस्जिद सुन्नी वक़्फ़ के एकाधिकार में हमेशा से रही है। गर हिन्दू रामजन्मभूमि की सटीक जगह बता दें तो सुन्नी वक्फ बोर्ड श्रीरामजन्मभूमि से मस्जिद हटा लेगा।
मुस्लिम पक्षकार ने ‘जन्मस्थान’ की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जन्मस्थान 'ज्यूरिस्ट पर्सन' नहीं हो सकता। राजीव धवन ने कहा कि जब जमीन ही देवता हो गई, तो फिर किसी और का दावा ही नहीं बन सकता, इसलिए जन्मस्थान को पार्टी बनाया गया है।