आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पाक लगातार कॉन्ग्रेस को हथियार बनाकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। उसने संयुक्त राष्ट्र को लिखे पत्र में राहुल गॉंधी के बयान का जिक्र किया था। बाद में राहुल ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए कहा था कि कश्मीर में हिंसा के पीछे पाकिस्तान का हाथ है।
ब्रिटिश होने के बावजूद टली भारत की वास्तविकताओं को उस राजनीतिक दल से कहीं अधिक समझते हैं जिसने दशकों तक देश पर शासन किया है। जिस हकीकत को टली जैसे विदेशी समझ लेते हैं वह कॉन्ग्रेस क्यों नहीं समझ पाती है, ये पूरी तरह से समझ से परे है।
राहुल गाँधी ने चुनाव के दौरान सरकार गठन के 10 दिनों के भीतर किसानों की क़र्ज़माफ़ी करने का ऐलान किया था। लेकिन लक्ष्मण सिंह के कहना है कि क़र्ज़माफ़ी किसी भी क़ीमत पर संभव नहीं है। राहुल गाँधी को ऐसा वादा नहीं करना चाहिए था।
32 साल की उम्र में विश्वेश्वरैया ने सिंधु नदी से सुक्कुर कस्बे को पानी भेजने की योजना तैयार की थी। उन्हें 'कर्नाटक का भागीरथ' भी कहा जाता है। उन्होंने बॉंध से पानी के बहाव को रोकने के लिए स्टील के स्वचालित द्वार और सिंचाई के लिए ब्लॉक सिस्टम विकसित किया जो इंजीनियरिंग का अद्भुत कारनामा माने जाते हैं।
फ़िरोज़ गाँधी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले अग्रणी नेताओं में से एक थे। नेहरू युग में एलआईसी कम्पनी में हुए घोटाले के ख़िलाफ़ फ़िरोज़ द्वारा आवाज़ उठाए जाने के कारण तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी को इस्तीफा देना पड़ गया था।
"राहुल गाँधी परिपक्व नेता की तरह व्यवहार नहीं कर रहे हैं। जब उनके नेता संसद में कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बता रहे थे, तब राहुल को जिम्मेदार नेता की तरह उन्हें रोकना चाहिए था और कहना चाहिए था कि कश्मीर पर कॉन्ग्रेस की राय वही है जो पूरे देश की है।"
अपनी कार में बैठकर मीडिया से बात कर रहे राहुल गाँधी के पास अचानक एक लड़का पहुँचा और उनको Kiss कर लिया। लड़के की इस हरकत के बाद राहुल गाँधी मुस्कराने लगे।
राहुल गॉंधी की बाल बुद्धि और बाल हठ से देश अरसे से परिचित है। जब से उन्हें मोदी के मुकाबिल खड़ा करने की कोशिश की गई उनका यह गुण बार-बार प्रकट होने लगा और हर बार वे 'गलती हो गई माफ कर दो' वाले भाव में आ जाते हैं। यह और बात है कि यूपीए काल में उनकी यह हरकत 'वाह जहॉंपनाह' के शोर में दब जाया करती थी।
लोगों ने थरूर से पूछा कि अब तो राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी नहीं रहे, तो फिर वे 'मालिक' कैसे हुए? लोगों ने कहा कि जो डैमेज होना था वह हो चुका, अब इन बयानों का कोई फ़ायदा नहीं।