विषय: लुटियंस मीडिया

JNU, मीडिया, दिल्ली पुलिस

उस रात लुटियन मीडिया होती तो हत्या खबर न होती, सरदार की गालियों पर प्राइम टाइम होता

JNU उपद्रव के बाद मीडिया द्वारा खुद को विक्टिम दिखाना। पुलिस-प्रशासन को विलेन बता, सोशल मीडिया पर लिखना। अगर यही सारे पत्रकार नक्सलियों द्वारा गला रेत लाश टाँगने की रिपोर्टिंग करने गए होते तो खबर गायब हो जाती और प्राइम टाइम होता अर्द्धसैनिक बल वाले सरदार की गाली और रिपोर्टरों की चाशनी में लिपटे प्रोपेगेंडा पर।
न्यूजलॉन्ड्री के बारे में एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि सीईओ अभिनंदन सेखरी एक गालीबाज, इन्सिक्योर और नक्सल हिमायती है

न्यूजलॉन्ड्री और अजेंडाबाज अभिनंदन: हीनभाव से ग्रस्त, नक्सल हिमायती जो साइट से हिन्दूघृणा बाँटता है

न्यूजलॉन्ड्री के एक पूर्व कर्मचारी ने CEO अभिनंदन सेखरी के बारे में कहा कि हिन्दुओं पर हुए अपराधों को दबाना, मुसलमानों पर हुए अपराधों में 'हिन्दू कनेक्शन' निकालना, सहकर्मियों को गाली देना, चिल्लाना और आम आदमी पार्टी के लिए अजेंडा चलाना, सेखरी का SoP है।
मीडिया प्रोपेगेंडा

शोभा डे और बिकाऊ मीडिया: जब गुलाम नबी ने खड़ी की थी किराए की कलमों (गद्दार, देशद्रोही पत्रकार) की फौज

81 पैराग्राफ के कबूलनामे में गुलाम नबी ने अपने कई अपराध कबूल किए थे। मुक़दमे के दौरान अदालत में सिद्ध हुआ था कि अपराधी (गुलाम नबी) न सिर्फ वक्ताओं की लिस्ट ISI से लेता था, बल्कि वो क्या बोलेंगे, ये भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था, आईएसआई ही तय करती थी।
लुटियंस (बाएँ) और खान मार्केट (दाएँ)

हाशिए पर खड़े लुटियंस-खान मार्केट गिरोह बने ‘प्राउड’ हिंदुस्तानी, इन्हें सत्ता की मलाई चाहिए

यह गैंग न होने का कैसा सबूत है कि पिता खान मार्केट बँगले में रहे, पति भी उसी सर्विस, उसी सर्किल में, और उसके बाद आपके दामाद की तैनाती बैंक की खान मार्केट शाखा में ?

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