चुनाव आयोग ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ प्राप्त शिकायतों में से अधिकांश में कहा कि वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में, सुष्मिता देव ने SC में मामले में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर कर चुनाव आयोग के फैसलों को संशोधित करने की माँग की थी।
"जब आपने हिन्दू आतंकवाद शब्द सुना तो आपको गहरी चोट पहुँची थी कि नहीं? हज़ारों साल के इतिहास में हिन्दू कभी आतंकवाद करे, ऐसी एक भी घटना नहीं है। अंग्रेजों ने भी कभी हिन्दुओं के हिंसक होने का जिक्र नहीं किया। कॉन्ग्रेस ने ये पाप किया।"
नामांकन दाखिल करने से पहले एक रैली को संबोधित करते हुए, शाह ने कहा, “मैंने अहमदाबाद के नारनपुरा में संघवी हाई स्कूल में एक बूथ कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और वहाँ से मैं पार्टी का अध्यक्ष बना।
प्रधानमंत्री मोदी जहाँ बनारस से चुनाव लड़ेंगे, वहीं अमित शाह को गाँधीनगर की ज़िम्मेदारी दी गई है। गाँधीनगर में भाजपा ने 1989 से आजतक चुनाव नहीं हारा है।
शाह ने एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिसमें उन्हें पता होता है कि विपक्षी नेता किस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने वाले हैं। उनकी पार्टी तैयार रहती है। वे 'सबूत-सबूत' चिल्लाते रहते हैं, शाह संगठन मज़बूत करने में लगे रहते हैं और एजेंडा सेट करते हैं।
ओडिसा के तटीय इलाक़ों में प्रभाव रखने वाले पांडा की उपस्थिति से भाजपा को आगामी चुनावों में काफ़ी उम्मीद है। उन्होंने ओडिसा के मुख्यमंत्री पटनायक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य में शासन व्यवस्था का स्तर काफ़ी तेजी से नीचे गिर रहा है।
जगह-जगह बैरिकेड्स लगाकर पुलिस ने रैली को रोकने की कोशिश की। जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने मिदनापुर में रैली के दौरान बैरिकेड्स तोड़ आगे बढ़ने की कोशिश की तो ममता बनर्जी की पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया।
हमने आतंकवाद को कठोरता से डील किया है। आजादी के बाद से किसी भी सरकार से ज्यादा अच्छा और कठोर रहा है हमारा रुख आतंकवाद के लिए, सबसे ज्यादा आतंकवादी हमारे समय में मारे गए हैं।
अतीत में शिवसेना की बात को गंभीरता से न लेने का दावा करने वाले कुछ तथाकथित पत्रकारों व विश्लेषकों ने सामना में छपने वाले लेखों का शब्दशः भावार्थ कर इसे भगवद् गीता की तरह बाँचना शुरू कर दिया था।