राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन को प्रभावी रूप से लागू करने और लोगों को प्रतिबंधों का उल्लंघन करने से रोकने में असफल होने के बाद केंद्र ने शहर को नियंत्रित करने और वायरस के बढ़ते प्रसार पर लगाम लगाने के लिए सेना भेजने की योजना बनाई थी। मगर राज्य सरकार के इनकार करने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया।
महाराष्ट्र कोरोना से देश का सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। सीएम उद्धव ठाकरे का अनुभवहीन होना इसका कारण बताया जा रहा है। इस बीच ऐसी भी चर्चा चल निकली है कि साख बचाने के लिए राज्य सरकार पीआर कैंपेन चला रही है। उर्वशी रौतेला ने अपना बचाव करते-करते एक ट्वीट से इसको और हवा दी है।
महाराष्ट्र कोरोना वायरस के संक्रमण से देश के सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में हैं। ऐसे वक्त में सोशल मीडिया में एक समूह रोजाना उसकी प्रशस्ति गान में जुटा है। लेकिन, इस गैंग के दावे और जमीनी हालात कहीं मेल नहीं खाते।
उद्धव ठाकरे ने बीते दिनों एल्गार परिषद की जाँच NIA को सौंपने को मँजूरी दी थी। पवार ने उद्धव के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। अब उनको समन जारी होने के बाद महाराष्ट्र सरकार के मतभेद और गहराने के कयास लगाए जा रहे हैं।
"मैं रामलला का आशीर्वाद लेने के लिए यहाँ आया हूँ। आज मेरे साथ मेरे 'भगवा' परिवार के कई सदस्य मौजूद हैं। मेरा सौभाग्य है कि पिछले डेढ़ साल में मैं तीन बार अयोध्या आ सका। मैं बीजेपी से अलग हूँ, हिंदुत्व से नहीं।"
करीब 8:30 बजे जब बस अमरनाथ जिले के बटेंगू पहुँची तभी इस्लामी आतंकवादियों के एक समूह ने बस पर हमला कर दिया था और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इसमें आठ यात्रियों की मौत हो गई और कुछ अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद जैसे ही पता चला था कि आतंकवादी पाकिस्तानी थे, ऐसे ही देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
"मुझे लगता है कि उद्धव ठाकरे ने सही रुख अपनाया है। शिवसेना के साथ हमारा गठबंधन विचारों पर आधारित था। उन्हें कॉन्ग्रेस और एनसीपी के दबाव की चिंता नहीं करनी चाहिए। यदि वे सरकार से निकल जाते हैं तो इस मुद्दे पर हम सरकार का साथ देंगे।"
संत ने जिला प्रशासन से माँग की है कि उद्धव ठाकरे को अयोध्या आने की अनुमति न दी जाए लेकिन अगर यदि वह अयोध्या आते हैं तो वो स्वयं काला झंडा लेकर उनके काफिले को रोकेंगे। उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के नाम पर लोगों को ठगा है इसलिए अब अयोध्या में इनके लिए कोई स्थान नहीं है।
"सरकार को संविधान के अनुसार इसके प्रारूप में परिवर्तन करने होंगे। संविधान में स्पष्ट है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती। जब उद्धव पूरे कानून को ध्यान से पढ़ेंगे तब उन्हें समझ आएगा कि NPR और NRC में बहुत फर्क नहीं है। एक बार आप NPR पर सहमत हुए तो NRC को नहीं रोक पाएँगे।"
महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्यपाल से सीधे जनता से सरपंच चुनने के पूर्ववर्ती सरकार के निर्णय को रद्द कर ग्राम पंचायत सदस्यों में से सरपंच चुनने संबंधी अध्यादेश जारी करने की शिफारिस की थी। जिसे राज्यपाल ने खारिज कर दिया।