सीजेआई ने लगभग एक महीने से अधिक समय से कृषि सुधार क़ानूनों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 'किसान आंदोलन' में निजामुद्दीन मरकज़ के तबलीगी जमात जैसी स्थित पैदा हो सकती है।
इस रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 334 में कृषि बदलावों का भी उल्लेख है। जिसके अंतर्गत मार्केटिंग रिफॉर्म की जानकारी देते हुए एपीएमसी से परे बाजार खोलने की बात स्पष्ट तौर पर लिखी गई है।
"पश्चिम बंगाल सरकार के अलावा सभी राज्यों की सरकारें पीएम सम्मान निधि योजना का हिस्सा बन चुकी हैं। जो किसानों के हमदर्द बनकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं, उन्हें जनता भविष्य में सबक सिखाएगी।"
इन कानूनों का धरातल पर उतरने के बाद ही उनका विश्लेषण किया जा सकता है। उससे पहले, केंद्र और राज्यों के संबंधों को कमजोर करना अथवा संसद द्वारा पारित कानूनों को फाड़ना कोई लोकतांत्रिक अधिकार नही बल्कि अराजकता है।
आंध्र प्रदेश के एक किसान को डब्बी मिर्च की अब तक की सबसे बड़ी कीमत मिली है। वह अपनी उपज बेचने कर्नाटक के बैदागी स्थित एशिया के सबसे बड़े मिर्च मार्केट में पहुँचे थे।
दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर जारी किसानों का विरोध प्रदर्शन ‘शाहीन बाग़’ बनने की राह पर है। चाहे वह कट्टरपंथियों की तस्वीरें लेकर उनकी रिहाई की माँग करना हो या प्रदर्शनकारियों द्वारा मीडियाकर्मियों पर हमला की कोशिश हो।