झारखंड की एक चुनावी सभा में राहुल गाँधी ने कहा था, “पहले 'मेक इन इंडिया' था, लेकिन अब यह 'रेप इन इंडिया' बन गया है।” इस बयान को लेकर उनकी काफी किरकिरी हुई थी। लोकसभा में भाजपा ने इसके लिए उनसे माफी की मॉंग भी की थी।
देश में चुनाव व्यवस्था में शुचिता, पारदर्शिता लाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। भारत में चुनाव व्यवस्था में जब-जब सुधार की बात की जाएगी, तब-तब शेषन को याद किया जाएगा।
जिन कंपनियों को लवासा मामले में खोजबीन करने के लिए कहा है, उनमें एनटीपीसी, एनएचपीसी लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड और आरईसी लिमिटेड शामिल हैं। इस पत्र के साथ ऊर्जा मंत्रालय ने एक सूची भी नत्थी की है, जिसमें उन 14 कंपनियों के नाम हैं जिनमें अशोक लवासा की पत्नी नावेल लवासा डायरेक्टर के पद पर तैनात रह चुकीं हैं।
झारखंड के 19 जिले नक्सल प्रभावित हैं। इनमें से 13 अति संवेदनशील हैं। इन जिलों में विधानसभा की 67 सीटें हैं। यही कारण है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम को ध्यान में रखते हुए चुनाव पॉंच चरणों में कराने का फैसला लिया गया है।
कदम एनसीपी के विधायक हैं। उन पर सरकार द्वारा संचालित अन्नाभाउ साठे विकास निगम का अध्यक्ष रहते हुए 150 करोड़ रुपए की गड़बड़ी करने का आरोप है। मौजूदा चुनाव में वे मोहोल से बतौर निर्दलीय लड़ रहे हैं।
कॉन्ग्रेस के 13, जदएस के 3 और एक स्वतंत्र विधायक को कर्नाटक विधान सोउधा (विधान सभा) के तत्कालीन अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने जुलाई में सदन के लिए अयोग्य करार दिया था। इन विधायकों के हट जाने से एचडी कुमारास्वामी की कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार गिर गई थी.....
महाराष्ट्र की 288 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जबकि हरियाणा की 90 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 2 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा सहित चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तीनों दलों के प्रतिनिधियों ने इस साल झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा में और जनवरी 2020 में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन को सुधारने का मौका माँगा।
तृणमूल और सीपीआई के अलावा एनसीपी के राष्ट्रीय दर्जे पर भी तलवार लटक रही है। अगर किसी पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन जाता है तो वह एक ही चुनाव चिह्न पर पूरे देश में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रह जाती है।