"मतगणना में 8 से 10 घंटे की संभावित देरी से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रक्रिया और लम्बी होने के पीछे ये तीन कारण हैं- वीवीपैट पर्चियों का मिलान, पोस्टल बैलेट्स की गणना और 'Electronically Transmitted Postal Ballots System (ETPBS)' की स्कैनिंग।"
ममता सरकार की इस बड़ी कार्रवाई में बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया का अनुसरण किए और बिना किसी चार्ज के कई भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली के लिए देश के कई क्षेत्रों से भाजपा नेता कोलकाता में जाकर ठहरे हुए थे।
स्वराज एक्सप्रेस के लिए यौन शोषण आरोपित विनोद दुआ ने एग्जिट पोल दिखाए थे, जिसे उन्होंने न्यूज़क्लिक नामक प्रोपेगेंडा वेबसाइट से उठाया था। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी एग्जिट पोल खुलेआम ट्विटर पर जारी किया था।
आईएएनएस ने खुद ही ट्वीट करते हुए ये बताया कि जारी किए गए एग्जिट पोल में सीटों की संख्या "मतदाताओं के एक सर्वेक्षण" पर आधारित है, जो कि साफ तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन है, क्योंकि किसी को भी मतदान के सभी चरणों के समाप्त होने के 30 मिनट बाद तक एग्जिट पोल प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है।
यह आदेश उत्तर प्रदेश की 14 सीटों के सभी ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र के माध्यम से जारी किया गया है। फ़िलहाल, यूपी की 27 सीटों पर मतदान होना अभी बाक़ी है।
राहुल के अनुसार भाषणों में मोदी सरकार के कामकाज की आलोचना करना आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। शहडोल में भाजपा की आदिवासी विरोधी नीतियों को लेकर दिया गया था। इसलिए शिकायत को रद्द किया जाना चाहिए।
फ्रंटलाइन के संपादक ने स्वीकार किया है कि उनकी रिपोर्ट झूठी है और इस सम्बन्ध में एक अन्य रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, TV9 Bharatvarsh ने अपनी वेबसाइट और Youtube से अपनी रिपोर्ट हटा दी है।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से साफ़ मना किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई कारण नहीं दिखाई दिया जिससे कि तेजबहादुर की याचिका पर गौर किया जाए।