टाइम्स के पत्रकार का अगर आप विडियो देखेंगे और कैप्शन पढ़ेंगे तो UP पुलिस के प्रति गुस्सा उमड़ेगा। मगर, इससे पहले कि कंवरदीप की आधी-अधूरी जानकारी का आप शिकार हों, आपको बता दें कि जैसा वो दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं, हकीकत उससे थोड़ी उलट है। वास्तविकता में जो विडियो में दिख रहा है, उसका उद्देश्य लोगों को सैनेटाइज करना था।
प्रसार भारती ने दि प्रिंट की इस खबर को शेयर करते हुए बताया है कि ये फेक न्यूज है। उनका कहना है कि प्रसार भारती इस खबर को लेकर लगातार कैबिनेट के संपर्क में है और कैबिनेट ने इसे लेकर हैरानी जताई है। कैबिनेट का साफ कहना है कि अभी तक उनके पास इस तरह का कोई प्लान नहीं है कि वे लॉकडाउन को एस्टेंड करने वाले हैं।
मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्विंट ने गिरधर ज्ञानी को डॉक्टर बताया। टास्क फ़ोर्स का संयोजक तक बता डाला। जबकि वे ना मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना कोई महामारी विशेषज्ञ हैं। यहॉं तक कि ऐसा कोई टास्क फोर्स भी नहीं है जिसका वामपंथी वेबसाइट ने दावा किया।
निर्झरी सिन्हा यानी, प्रतीक सिन्हा की मम्मी ने इस तस्वीर के जरिए PM मोदी के 21 दिनों के लॉकडाउन के ऐलान का उपहास करने का प्रयास किया लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ दिन से माँ-बेटों के षड्यंत्र को ज्यादा बल मिल नहीं पा रहा है।
...चोरी पकड़ी इसलिए गई, क्योंकि इस ट्विटर अकाउंट ने नाम तो बदल लिया लेकिन वो अपना यूजरनेम या फिर ट्विटर हैंडल का नाम नहीं बदल पाए। तैयारी अधूरी रह गई और प्रपंच पकड़ा गया। इसका मतलब है कि प्रतीक सिन्हा ने एक फेक अकाउंट का ट्वीट शेयर किया।
जहाँ एक तरह पीएम मोदी जनता कर्फ्यू की अपील कर लोगों को संक्रमण से बचाव के उपायों पर अमल करने को कह रहे हैं, वहीं कुछ नेता लगातार अफवाह फैलाने में लगे हैं। त्रिवेदी उनमें से ही एक हैं। कॉन्ग्रेस परस्त पत्रकार इसे आगे बढ़ाने में लगे हैं।
'आजतक (इंडिया टुडे)' के पत्रकार ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए दिल्ली के एक इलाक़े में गया हुआ था। वहाँ से उसने बताया कि उस क्षेत्र में पुलिस की तैनाती नहीं की गई है। उसने एक तरह से दिल्ली पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की। देखिए कैसे एक जिम्मेदार नागरिक ने उसकी पोल खोली।
'दी प्रिंट' की इस खबर में बताया गया था कि वित्त मंत्री ने मुंबई के उद्योगपतियों का अपमान किया है। इसके बाद वित्त मंत्री के व्यवहार पर ज्ञान देते हुए दी प्रिंट ने लिखा है कि निर्मला सीतारमण लोगों की खिंचाई करने के लिए जानी जाती हैं, खासतौर पर जब वो किसी मुद्दे पर हाशिए पर हों।
'इंडिया टुडे' लिखा कि 430 दलितों ने इस्लाम अपना लिया है और कई अन्य इसी राह पर हैं। साथ ही ये भी लिखा गया कि क्षेत्र के दलितों ने भेदभाव की बात कही है। कुछ दलितों के बयान भी प्रकाशित किए गए हैं। दिसंबर में भी 'आजतक' ने ये ख़बर चलाई थी, जिसे वहाँ के दलितों ने नकार दिया था।
फ़र्ज़ी पत्र वायरल करने वाले ने एक ग़लती ये की है कि उसने भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय का पता लिख दिया है। जबकि, मनोज तिवारी के पत्र में भाजपा के राज्य मुख्यालय का पता लिखा होता है। अर्थात, पता 'पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्ग' न होकर 'पंडित पंत मार्ग' होगा।