दिक्कत है मामले की गंभीरता और शब्दों के चुनाव से छिछोरेपन को, सेक्सिस्ट बयान को, नारीविरोधी शब्दों को 'तंज' और 'ज़ुबानी जंग' के नाम पर ऐसे प्रस्तुत करना जैसे इतना तो चलता है।
लायोनेल बार्बर अपने समाचारपत्र फाइनेंशियल टाइम्स की ओर से भारत के आम चुनावों को कवर कर रहे हैं। इसी दौरान अपने एक दौरे पर, लिखते हुए उन्होंने जयाप्रदा पर आजम की टिप्पणी का उल्लेख किया और लिखा, "कोई बुरा कथन नहीं है, हालाँकि इसके लिए खान पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया गया।”
रवीश एक घोर साम्प्रदायिक और घृणा में डूबे व्यक्ति हैं जो आज भी स्टूडियो में बैठकर मजहबी उन्माद बेचते रहते हैं। साम्प्रदायिक हैं इसलिए उन्हें मजहबी व्यक्ति की रिहाई पर रुलाई आती है, और हिन्दू साध्वी के चुनाव लड़ने पर यह याद आता है कि भाजपा नफ़रत का संदेश बाँट रही है।
लड़ाई मजेदार है। इस चुनाव में AAP-कॉन्ग्रेस से लेकर उन तमाम न्यूट्रल पक्षकारों की भी अस्मिता दाँव पर लगी है जो अभी तक विभिन्न संस्थाओं पर कब्ज़ा जमाकर सत्ता की मलाई खा रहे थे।
बहस के दौरान कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप को ‘बहनजी’ कह दिया। इस 'बहन जी' शब्द से अंजना इतनी आहत हुई कि उन्होंने तुरंत कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को बदले में 'आंटी जी' कह दिया।
60 सालों तक राज करने वाली पार्टी की मजबूरी है कि वो सत्ता से दूर है, और यह दूरी रात-दिन बढ़ती जा रही है। सत्ता पाने की यही लालसा उससे नए-नए हथकंडे आजमाने का दुष्चक्र चलवाती है। लेकिन जब बड़े और नामी चेहरे भी इस धूर्तता का हिस्सा बनने लगते हैं तो अफ़सोस होता है।
बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।
इस परीक्षा में मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले प्रदीप सिंह को ऑल इंडिया में 93वीं रैंक मिली है। बेहद साधारण परिवार से आने वाले प्रदीप के पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।
हाल ही में भारत में फ़ेसबुक ने अकारण ही भाजपा समर्थक एक बड़े पेज The Third Eye और कॉन्ग्रेस समर्थक 600+ छोटे-मोटे पेजों को बैन कर दिया था। क्या फ़ेसबुक इस टैब में भी वामपंथी और अपने bias पर आधारित ख़बरें ही चलाएगा?
मलाला से महिलाओं के अधिकार पर आवाज उठाने की माँग करने वाली लड़कियों के ट्विटर एकाउंट्स में अपने जननांगों की तस्वीरें भेजने वाले ये लोग पाकिस्तान और कश्मीर के युवा थे। भारतीय मीडिया गिरोह इन्हें भटके हुए युवाओं के नाम से जानता है, जो या तो किसी हेडमास्टर के बेटे निकल जाते हैं या फिर भारतीय सेना द्वारा सताए गए मजबूर युवा।