मार्क्सवादियों ने दिल्ली के राजनीति चश्मे से मुगलों का महिमामंडन और हिन्दू-मुस्लिम एकता के खोखले दावे करते हुए मनगढ़ंत इतिहास गढ़ा। इतिहास लेखन के कार्य में वामपंथियों ने दक्षिणपंथियों को बिल्कुल हाशिए पर रखा। जबकि वो यह अच्छी तरह से जानते थे कि वास्तव में वो भारत का इतिहास था ही नहीं, जिसका प्रचार वामपंथी अपने प्रोपेगेंडा के तहत कर रहे थे।
वरुण ग्रोवर की कविता 'कागज नहीं दिखाएँगे' को काटती बहुत अच्छी कविताओं में से एक कविता है ऊर्वी सिंह की। यह लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी की सहायक अध्यापिका हैं। सुनिए उनकी कविता, उन्हीं की आवाज में, जो तोड़ती है छद्म लिबरलों और स्वघोषित बौद्धिकता का भाव पाले बैठे लोगों का घमंड।
दोनों ने एक नौसेना अधिकारी के दो बच्चों का अपहरण किया। मगर टुच्चे कार चोरों से अपहरण जैसा बड़ा अपराध संभला नहीं। बेटा छोटा था, पकड़े जाने के डर से संजय चोपड़ा नाम के इस बच्चे की नृशंस हत्या कर दी दोनों ने मिलकर। बड़ी बहन गीता को भी बलात्कार के बाद मार डाला। इन्हीं दोनों को अरुंधति 'हीरो' के तौर पर...
अरुंधति रॉय ने कहा कि पीएम मोदी ने जानबूझ कर झूठ बोला क्योंकि उन्हें पता है कि मीडिया उनके हाथ में है, जो सच्चाई नहीं दिखाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस मुस्लिमों के घर-घर जाकर उन्हें लूट रही है।
"इंसान को आस्था की ज़रूरत ही नहीं है। इंसान की आस्था की 'इंसान' है, इंसान की जाति 'इंसान' है... पहली बार आस्था को नागरिक होने के पैमाने के तौर पर माना जाएगा।"
विधेयक के मुट्ठी-भर विरोधी इकट्ठे होकर जताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे समूचे कैम्पस के प्रतिनिधि हैं। इस षड्यंत्र में उनके साथ कुछ वामपंथी समाचापत्र भी हैं।
एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल पर आरोप था कि वे पलक्क्ड़ में अक्टूबर माह में मारे गए संदिग्ध माओवादियों के एनकाउंटर के विरोध के नाम पर माओवादी पर्चे बाँट रहे थे।
पूरे थाने को ही पता नहीं था कि जिस व्यक्ति की इसी थाने में हत्या के प्रयास में तलाश है, वह सामने ही खड़ा है। जब मीडिया ने पूछा था तो इसी पुलिस ने कहा था कि वह हमलावरों की तलाश में हैं।
"JNU छात्रावास में रहने वाले करीब 6000 छात्रों में से 5371 को फेलोशिप या छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक मदद मिलती है। छात्रावास मेस न हानि न लाभ के सिद्धांत पर चलता है। लेकिन जब तीन करोड़ रुपए बकाया हो तो इनका संचालन कैसे और कब तक होगा?"
"JNUTA प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को तो अपना समर्थन दे रहा है, मगर जिन शिक्षकों को स्टूडेंट्स ने कुछ दिनों पहले बंधक बनाया था या उनके और उनके परिवारजनों के साथ बदसलूकी की थी, उनके खिलाफ असोसिएशन कोई कार्यवाही तो दूर, निंदा तक नहीं कर रहा।"