स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?
देश में वैक्सीनेशन के तीसरे चरण के तहत सोमवार को सरकार ने 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को टीकाकरण की इजाजत दे दी है। बता दें कि देश में 1 मई से वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है।
राहुल गाँधी भले ही केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए वैक्सीन का सहारा ले रहे हों और वैक्सीन फॉर ऑल की माँग कर रहे हों लेकिन इससे यह साबित होता है कि उन्हें वैक्सीन और उसके वितरण संबंधी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं है।
अब तक विश्व समुदाय के लिए 229.7 लाख यानी सवा दो करोड़ से ज्यादा कोरोना टीकों की खुराक की आपूर्ति की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि टीकों की 64.7 लाख डोज अनुदान के तौर पर मुहैया कराए गए हैं, जबकि 165 लाख डोज व्यावसायिक आधार पर दिए गए।
"भारत में बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है इसलिए हम भारतीय संस्थानों के लगातार संपर्क में हैं। दुनिया को समझना चाहिए कि इसका पूरी तरह से उपयोग किया जाना चाहिए।"
वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू होने के बाद से भारत में इसके बहुत ही कम साइड इफ़ेक्ट देखे गए है। वहीं दुनिया के करीब 92 देशों ने भारत की कोवैक्सीन और कोविशील्ड मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन की माँग की है।