एमबीए के दौर में इवेंट मैनेजमेंट एक विषय बन चुका है, और आंदोलन में ग्लैमर की कमी हमेशा रही। अगर आंदोलन आदि व्यवस्थित तरीके से नहीं होंगे, तो इस विषय को शादी की प्रीवेडिंग फोटोशूट और 'राते दीया बुता के पीया क्या-क्या किया' वाले नाच तक में ही समेट दिया जाएगा।
पहले सांसद कानून बनाते थे, तो अभी भी वही बनाएँगे, ये कहीं से भी उचित नहीं है। अच्छी बात तो यह होगी कि किसान अपने कानून स्वयं बनाए, आतंकी UAPA में संशोधन करे, डॉक्टर निजी प्रैक्टिस पर बिल बनाएँ।
ख़ुफ़िया रिपोर्टर कॉमरेड पैट्रिक जिन्ना ने बताया कि ये भारत बंद और कुछ नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अम्बानी सहित तमाम पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने की साजिश का ही पहला चरण है।