Wednesday, April 14, 2021
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WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी में अडानी-अम्बानी कनेक्शन ना ढूँढ पाने पर अवसाद में गया वोक लिबरल

इस बदलाव को ही शुक्रवार की क्रांति मानकर वोक राजू ने आव देखा न ताव और तुरन्त रजाई त्यागकर गूगल सर्च करने निकल पड़ा कि आखिर इन नीतियों से अडानी और अम्बानी को किस तरह फायदा हो सकता है?

व्हाट्सऐप (WhatsApp) ने अपनी गोपनीयता नीतियों में कुछ बदलाव किए हैं। दुर्भाग्य से, इस नीति में बदलाव के बावजूद वोक राजू नाम के वोक लिबरल की जिन्दगी में कोई खास बदलाव नहीं आया। हालाँकि, अब वो अवसाद में जरूर चला गया है। और इस तरह आखिरकार वो कम से कम इसके लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा सका है।

दरअसल, ये घटना गत शुक्रवार रात करीब 11 बजकर 59 मिनट की है। अपने ‘किसान साथी एकता समूह’ नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में ‘गुड नाइट जी’ का संदेश प्रेषित करते अचानक एक सन्देश वोक राजू की मोबाइल स्क्रीन पर नजर आया। सन्देश में व्हाट्सऐप की नीतियों में कुछ बदलाव की बात कही गई थी।

इस बदलाव को ही शुक्रवार की क्रांति मानकर वोक राजू ने आव देखा न ताव और तुरन्त रजाई त्यागकर गूगल सर्च करने निकल पड़ा कि आखिर इन नीतियों से अडानी और अम्बानी को किस तरह फायदा हो सकता है?

रातभर एक तपस्वी की भाँति यहाँ-वहाँ से ‘अम्बानी कनेक्शन’ ढूँढने के बाद भी जब आखिरकार राजू के हाथ बस नाकामयाबी ही लगी तो उसने आखिरकार ये कहकर सुबह 4 बजे सोने का फैसला किया कि इंसान के लिए पहले सोना जरूरी है। वोक राजू ने पालिका बाजार से खरीदी हुई एक शायरी की किताब में पढ़ा था कि क्रांति इंतजार कर लावा बनकर बहती है। इस पर अंतिम निष्कर्ष यही निकला कि राजू को कुछ देर सो ही जाना चाहिए।

अगले दिन, शनिवार सुबह नियमित अभ्यास की ही तरह उठते ही राजू ने सबसे पहले बिना आँखें खोल अपने मोबाइल को अनलॉक करने का करतब दोहराया और उसमें गूगल खोलकर कीवर्ड्स डाले- “सुबह उठने से अम्बानी-अडानी को होने वाले फायदे” मगर राजू के माथे पर पसीना तब उतर आया जब उसकी मोबाइल स्क्रीन पर Jio का ही एक और सन्देश आया, जिसमें लिखा था कि आप आने मोबाइल की दैनिक डेढ़ जीबी रात को ही समाप्त कर चुके हैं।

अब वोक राजू के क्रोध का ठिकाना न रहा। उसने शपथ ली कि आज वो बिना अम्बानी और अडानी की ईंट से ईंट बजाए सोएगा नहीं। इसके लिए वोक राजू ने सबसे पहले अपनी महबूबा को फोन कर एक 4G टॉप-अप रिचार्ज करने की मिन्नतें माँगी।

रिचार्ज होते ही वोक राजू ने प्रगतिशील फेसबुक ग्रुप से लेकर तमाम ट्विटर एकाउंट तलाश मारे मगर कहीं से उसके हाथ अम्बानी के खिलाफ कोई सबूत नहीं लगा। परिणाम ये हुआ कि इस खोज में राजू के 8-10 वो अहम घण्टे खत्म हो गए, जिनमें उसने फेसबुक पर क्रांति की कविताएँ पोस्ट करने में व्यर्थ करना था।

आखिरकार, थक-हारकर वोक राजू ने फैसला किया कि क्रांति जाए तेल लेने, पहले उचित कैलोरी जरूरी है, तभी दिमाग भी सही तरह से काम करता है। लेकिन तब तक कहीं ना कहीं, व्हाट्सऐप की नीतियों से अम्बानी को होने वाले लाभ पर कुछ भी हाथ ना लगने के चलते राजू के मन में एक निराशा का भाव पैदा हो चुका था। जब घरवालों ने उसकी मनोदशा पर गौर किया तो वे उसे एक मनोचिकित्सक के पास ले गए। डॉक्टर्स ने कहा कि वोक राजू में अवसाद के लक्षण नजर आ रहे हैं, जिसके उपाय के लिए उसे और अधिक क्रांतिकारी बातें सुननी होंगी।

वोक राजू के परिवार ने फैसला किया है कि वो राजू को किसान आंदोलन में बैठे किसान साथियों के साथ भेज देंगे। उन्होंने तर्क दिया कि अरविंद केजरीवाल द्वारा किसानों के लिए लगवाए गए मुफ्त इंटरनेट से वोक राजू जल्द ही अवसाद से उबरने में कामयाब रहेगा।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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