BBC द्वारा बनाए गए हिंदूघृणा से लिप्त इन खबरों/कार्टून्स/वीडियो की ख़ास बात और हिन्दू धर्म की खूबसूरती यही है कि ये सभी आज भी BBC की वेबसाइट पर मौजूद हैं।
मुस्लिम संगठन की शिकायत के बाद BBC हिंदी ने अपने चैनल से एक ऐसे वीडियो को डिलीट कर दिया है, जिसमें BBC द्वारा कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का चित्र दिखाया गया था।
1942 में आज़ाद हिन्द रेडियो के एक प्रसारण से नेताजी द्वारा 'ब्लस्टर ब्लफ कॉर्पोरेशन' का तमगा BBC को मिला, अर्थात धमकियाँ देकर ठगी करने वालों का समूह। तब परिस्थितियाँ कुछ और थी अब कुछ और हैं।
"बीबीसी पर हमेशा से आरोप लगते रहे हैं कि वह वामपंथ से प्रेरित है या वामपंथ का पक्ष लेता है। इस तरह के आरोप सिर्फ इंग्लैंड में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लगाए जाते हैं।"
बीबीसी की इस दर्दभरी हेडलाइन के भीतर जाने पर पता चलता है कि यह लेख सिर्फ और सिर्फ फेक न्यूज़ और भ्रामक तथ्य फैलाने की स्वीकृति माँगने के अलावा और ज्यादा कुछ नहीं कहती है।
“हर देश के अपने अलग-अलग मुद्दे होते है, हमें दुनिया को सुधारने की कोशिश करने से पहले अपने भीतर की बुराई से निपटना होगा। और ऐसा करने में हम असफल हो रहे हैं।"
क्या BBC इतना मासूम है कि वह कोरोना के संक्रमण के इस बड़े माध्यम (तबलीगी जमात) से अभी तक अनजान है? कि इस मरकज से निकले हुए लोग आखिर किन-किन जगहों पर नहीं गए होंगे?
चाइनीज वायरस के इस आपदा काल में कुछ पार्ट टाइम भोजपुरी पत्रकार पत्रकारिता के नाम पर हिन्दू घृणा से डिस्टर्ब हो गए हैं। ऐसे डिस्टर्ब लोगों का लक्ष्य चाइनीज कोरोना वायरस से लगातार सफलतापूर्वक लड़ रहे भारत की बड़ाई करना नहीं बल्कि हिन्दुओं और भाजपा सरकार को नीचा दिखाना है।
बीबीसी कहता है कि रंजन गोगोई ने 'अलिखित सिद्धांतों' का पालन नहीं किया। वही बीबीसी, जो मीडिया के लिखित व अलिखित, सभी सिद्धांतों की रोज अनगिनत बार धज्जियाँ उड़ाता है। बीबीसी के इस लेख से पता चलता है कि असली घाव तो राम मंदिर से हुआ है।