इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, "हम यहां (मध्यप्रदेश) सरकार गिराने का कारण नहीं बनेंगे। कांग्रेस नेता खुद ही सरकार के पतन के लिए जिम्मेदार होंगे। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।"
अगर मंत्री किसी प्रशंसक को मजाक में ही सुबह बोलते हैं कि आप दिल्ली आ जाइए चाय पीने, तो लोग शाम तक सच में दिल्ली उनके कार्यालय पहुँच जाते हैं। कई प्रशंसक तो मंत्री से मिलने के लिए पास बनवाने के लिए यह संदेशा भिजवाते हैं कि उन्होंने बचपन में मंत्री के साथ पढ़ाई की है और उनके मित्र हैं, इसलिए मिलना चाहते हैं।
105 वोट विशवास मत के विरुद्ध पड़ने के बाद जहाँ भाजपा ने इसे जनादेश की जीत बताया है, वहीं महबूबा मुफ़्ती ने इसे देश के लोकतंत्र में एक काला दिन करार दिया है।
2004-05 में ब्रदर सिरिल लकड़ा ने ₹2.6 लाख में 4.23 एकड़ ज़मीन खरीदते हैं। ख़रीदी तो व्यक्तिगत तौर पर लेकिन मिशनरी संस्था में फ़ादर, ब्रदर, सिस्टर को ज़मीन रखने का अधिकार नहीं। इसलिए बेचते समय मिशनरी संस्था सामने आ जाती है और ₹4.76 करोड़ में डील फाइनल कर ली जाती है।
नाहिद जिन लोगों के हक और रोजगार की बात के लिए लड़ाई लड़ने और हक के लिए आवाज उठाने की बात कह रहे हैं, वो लोग कैराना के सराय इलाके में अवैध रुप से रह रहे थे। प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन है, जिस पर केवल सरकार का अधिकार है ।
"कॉन्ग्रेस ग़रीब व आदिवासी की सेवा करने की अपनी विचारधारा से भटक कर केवल स्वार्थ की राजनीति कर रही है। निर्धन व सामान्य लोगों की सेवा करने के लिए सत्ता में होना आवश्यक है। मैंने कॉन्ग्रेस में रहकर भी ग़रीब व आम लोगों के हितों की बात की, लेकिन वहाँ सुनने वाला कोई नहीं है।"
राज्यपाल ने स्पीकर को पत्र लिखकर गुरुवार को ही विश्वासमत परीक्षण कराने पर विचार करने को कहा था। फिर भी स्पीकर रमेश कुमार ने बिना विश्वासमत परीक्षण कराए विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी।
TMC नेता मदन मित्रा अपने गृहक्षेत्र भोवनीपुर में न केवल पूजा-पाठ करवाएँगे, बल्कि दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा के साथ भगवान श्री राम और देवी सीता की मूर्ति भी स्थापित करवाएँगे। मित्रा का कहना है कि वो यह सब किसी राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक भारतीय नागरिक होने के नाते करवा रहे हैं।
नीरज शेखर 2 बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निधन के बाद 2007 में बलिया सीट से पहली बार जीत हासिल की थी और बाद में वो 2009 में फिर से सांसद निर्वाचित हुए थे। 2014 में हार का मुँह देखने के बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया।