एक तरफ योगेंद्र यादव 'बाबासाहब के सपनों' की बात करते हुए जाति मिटाने की भी बात करते हैं, दूसरी तरफ ये भी चाहते हैं कि हर कोई अपनी जातिगत पहचान आगे करे। दोनों चीजें एक साथ कैसे हो सकती हैं?
ब्राह्मण और बनिया समुदाय को गाली देने के अलावा, उन्होंने "जय भीम-जय मीम" और "जय सावित्री-जय फातिमा" जैसे नारे लगाए। उन्होंने जाति जनगणना और आरक्षण की भी माँग की।
न्यायमूर्ति अनीता सुमंत ने कहा था कि जातियों में समस्या है लेकिन यह व्यवस्था एक सदी से भी कम पुरानी है और इसका दोष पुरातन वर्ण व्यवस्था पर नहीं मढ़ा जा सकता।"
नरहरि अमीन 1974 में गुजरात में हुए 'नवनिर्माण आंदोलन' के सबसे सक्रिय नेताओं में से एक थे। वो फरवरी 1994 से मार्च 1995 तक राज्य के उप-मुख्यमंत्री रहे हैं।