राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने जम्मू कश्मीर के गुर्जर मुस्लिम गुलाम अली को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। लेकिन रोहिणी सिंह और कॉन्ग्रेस नेता को लगा वो गुलाम नबी आजाद हैं।
क्या कॉन्ग्रेस पार्टी उस माहौल को पूरे देश में ले जाना चाहती है, जो दिल्ली को झेलना पड़ा? आंदोलनजीवियों का साथ और ये 60 कंटेनर्स से तो ऐसा ही लगता है। या इमरान खान की नक़ल कर के पाकिस्तान वाला माहौल बनाना है?