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केवल मंदिर में आरती नहीं, गाइडेड मेडिटेशन और मंत्रों की रील्स बनीं भक्ति का नया स्वरूप: कैसे भारत के Gen Z आध्यात्म को बना...

भारत की जनरेशन Z परंपरागत धर्म से हटकर आध्यात्म को मानसिक शांति, डिजिटल जुड़ाव और आत्म-खोज के रूप में अपना रही है।

क्या है महर्षि वाल्मीकि को ‘डाकू’ बताने वाली लोककथा, जिसके कारण अंजना ओम कश्यप पर हुई FIR: जानिए कैसे अलग-अलग थे ‘रत्नाकर’ और ‘अग्निशर्मा’

अंजना ने जो कहानी सुनाई, वह कहाँ से आई? यह कोई नई बात नहीं। यह सदियों पुरानी लोककथा है, जो वाल्मीकि जयंती पर हर साल सुनाई जाती है।

जनजातीय परंपराएँ, तांत्रिक अनुष्ठान और देवी मावली की रहस्यमयी यात्रा: बस्तर में 75 दिनों तक चलता है दशहरा, माँ दंतेश्वरी की आराधना है इसकी...

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मनाया जाने वाला 'बस्तर दशहरा' भारत का सबसे लंबा और अनोखा धार्मिक त्योहार है, जो 75 दिनों तक चलता है।

पूतना राक्षसी का वध, बुराइयों का अंत और राजघराने की कहानी: जानिए नागपुर में 149 साल से मनाए जा रहे ‘मारबत उत्सव’ का क्या...

महाराष्ट्र के नागपुर में शनिवार (23 अगस्त 2025) को 'मारबत उत्सव' मनाया गया। यह एक पुरानी और अनोखी सांस्कृतिक परंपरा है।

‘विकसित भारत 2047’ का विजन लेकर न्यूयॉर्क में निकली ‘इंडिया परेड डे’, रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा को ‘ग्रैंड मार्शल’ सम्मान

भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क में ‘इंडिया डे परेड’ का आयोजन किया गया। यह देश के बाहर होने वाला सबसे बड़ा परेड समारोह है।

जानिए ‘एक चुटकी सिंदूर’ का महत्व, जो भारत ने पाकिस्तान को समझाया: हजारों वर्षों से सुहागिनों का है श्रृंगार, हनुमान जी को भी है...

स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में देवी पूजा के संदर्भ में सिंदूर का उल्लेख है। माँ पार्वती और माँ दुर्गा के लिए यह दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।

एक दिन यूँ ही भारत के लिए निकल पड़ी डेनमार्क की युवती, 10 महीने बाद लिखा- यह जीवन का सबसे अच्छा फैसला, यही है...

डेनमार्क की एस्ट्रिड एस्मेराल्डा ने भारत में उनकी जिंदगी को बेहतरीन बताया है। उनका कहना है कि अपना देश छोड़कर भारत आना उनके जीवन का सबसे सही फैसला था।

184 साल पहले आए अमेरिकी पादरी, नागा ‘संस्कृति’ को बताया पाप… अब नागालैंड में ‘चावल वाली बियर (जो है वहाँ की संस्कृति)’ पर चर्चों...

ये बात भली-भाँति जानते हुए कि राज्य में शराब बिक्री पर छूट केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं दी गई बल्कि जनजातीयों की संस्कृति को देखते हुए दी गई है, चर्चों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।

राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पहली दीवाली मना रही अयोध्या, जानिए क्यों इसे कह रहे ‘महापर्व’: दीपदान की तैयारियों से लेकर सुरक्षा तक...

अयोध्या के एक महंत ने कहा कि उनकी उम्र 50 साल से अधिक हो रही है, पर इतनी भव्य दीपावली उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।

विमुक्त घुमंतू जनजातियों की नारकीय स्थिति: अंग्रेजों का बोया बीज जो बन गया स्थायी कलंक, स्वतंत्रता के 77 वर्षों बाद भी उपेक्षित

सरकार ने समय-समय पर घुमंतू और विमुक्त जनजातियों के उत्थान के लिए कई योजनाएँ बनाई हैं, लेकिन ये योजनाएँ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं।

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