रावत के वकीलों ने अदालत को बताया कि इस मामले की जॉंच का अधिकार सीबीआई को नहीं है। राज्य सरकार ने राष्ट्रपति शासन के दौरान जारी नोटिफिकेशन वापस लेकर SIT से जॉंच कराने का फैसला किया था।
"सरकार पारम्परिक तरीके से माता त्रिपुरेश्वरी मंदिर में पूजा करती आ रही है। पशु बलि का अनुसरण स्वतंत्रता से पहले, महाराजा के शासनकाल से चली आ रही है। घरेलू तौर पर दी गई पशु बलि पूजा करने का एक अभिन्न अंग रहा है, तो इसे रोका कैसे जा सकता है?"
गोपनीय रिपोर्ट की शुरुआती जाँच के बाद तीनों जजों पर लगे आरोपों को सही पाया गया और तीनों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के साथ ही तीनों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इसका जवाब मिलने के बाद हाईकोर्ट आगे की कार्यवाही करेगा।
अदालत ने कहा कि वैशाली पर अत्याचार किए जा रहे थे, जिसके कारण उसने जीने की उम्मीद खो दी थी। उसकी सास उससे दुर्व्यवहार करती थी और उसका पति चुप्पी साधे रखता था, जो वैशाली के लिए शारीरिक और मानसिक यातना देना जैसा था।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट ईसाईयों के बीच विवाद में व्यवस्था दी थी कि चर्च संविधान ऑर्थोडॉक्स धड़े को चर्चों का प्रशासन करने का अधिकार देता है। केरल हाई कोर्ट के जज ने इस फैसले के विरुद्ध जाकर...
गोंजाल्विस के पास मिली एक सीडी के नाम में ही 'राज्य के दमन का विरोध' था। मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, वार एंड पीस इन जंगलमहल, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू वगैरह भी बरामद की गईं। अदालत ने गोंजाल्विस से पूछा की ये किताबें और सीडी उनके घर में क्या कर रही थीं?
सुनवाई में पाँचों पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है तो क्रिकेटर मोहम्मद शमी और उनके परिवार के लोग भी मुश्किल में पड़ सकते हैं, क्योंकि हसीन जहाँ की अर्जी में पुलिस वालों पर शमी व उनके परिवार वालों के दबाव में ही काम करने का आरोप लगाया गया है।
जज वी चिताम्बरेश के अनुसार ब्राह्मण की विशेषताएँ 'स्वच्छ आदतें, उत्कृष्ट सोच, शानदार चरित्र, अधिकांशतः शाकाहारी होना, शास्त्रीय संगीत का पुजारी' होना है। उनके मुताबिक जब किसी व्यक्ति में यह गुण आ जाते हैं, तो वह ब्राह्मण हो जाता है।
भगवा ध्वज फहराना दलित उत्पीड़न के अंतर्गत अपराध नहीं है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए एक मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपित को जमानत दी।
"अगर किसी वयस्क व्यक्ति के पास अपनी कोई तस्वीर है जो अश्लील है तो 1986 के अधिनियम 60 के प्रावधान तब तक उस पर लागू नहीं होंगे, जब तक उसे किसी अन्य उद्देश्य या विज्ञापन के लिए वितरित या प्रकाशित न किया जाए।"