जैश और लश्कर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोल खुलने के कारण आईएसआई ने एक नए नाम से आतंकी संगठन तैयार किया है। इसका नाम अल-उमर-मुजाहिद्दीन (AUM) है। इसका अगुआ मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लातराम है।
खलील अहमद और नाजिम खोखर ने बताया कि रावलपिंडी सैन्य मुख्यालय में उनकी मुलाकात पाक सेना के कुछ बड़े अधिकारियों से कराई गई। इसके बाद कश्मीर में हमले के लिए 7 लश्कर आतंकियों का ग्रुप तैयार किया गया। इनमें 3 अफगानी मूल के आतंकी हैं।
आईएसआई अधिकारियों और मौलवियों ने बीते हफ्ते बलूचिस्तान और पाकिस्तानी पंजाब के इलाकों का दौरा किया है। इसका मकसद आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए नए लड़कों की बहाली करना है।
"हिन्दू राष्ट्रवादी मेरे पुराने विडियो क्लिप को निकाल हंगामा मचा रहे हैं। भारत में अभी फासिज्म का वातावरण तैयार हो रहा है। जो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे बदनाम होने, ट्रोल किए जाने, जेल में भेजे जाने और पिटाई किए जाने का डर है।"
इससे पहले अहमद खान नौशेरा, सुंदरबनी और पल्लनवाला सेक्टरों में आतंकवादियों की भारत में घुसपैठ कराता रहा है। घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तानी सेना ने उसे विशेष रूप से तैनात और प्रशिक्षित किया था।
नेहरू को माउंटबेटन ने आगाह किया था कि युद्ध हो सकता है। लेकिन उन्होंने उस चेतावनी को नज़रअंदाज कर CDS का गठन नहीं किया। बाद में वह इस भावना से ग्रसित हो गए कि सेनाध्यक्ष उनकी कुर्सी हथिया लेगा। आज मोदी ने सेना की वर्षों पुरानी माँग पूरी कर दी।
ट्वीट में शेहला ने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
मेजर पूनिया ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कॉल करने वाले ने धमकी दी है कि अगर उन्होंने भारत-पाक से संबंधित ट्वीट करने बंद नहीं किए तो वो उनकी अश्लील वीडियो वायरल कर देंगे।
जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तक आपने सब कुछ अच्छे तरीक़े से संभाला हुआ है, आपका आर्मी कमांडर होने के नाते मुझे आप सभी पर गर्व है, जो भी चुनौती हमारे सामने आएगी हम उस पर अच्छी तरह से फ़तह पाएँगे।”
भारत में एक ब्यूरोक्रेट को मिलिट्री और सुरक्षा सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए रखा जाता था। वो ब्यूरोक्रेट किसी भी क्षेत्र से आया हुआ हो सकता था और उसे सेना व सुरक्षा ऑपरेशन्स की कितनी समझ है, इससे कोई लेना-देना नहीं था। इसीलिए सीडीएस का पोस्ट क्रिएट करना आवश्यक था।