बगदादी के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की कमान अब्दुल्लाह कार्दश संभालने वाला था। लेकिन अमेरिकी फ़ौज की कार्रवाई में किए गए हमले के दौरान बगदादी के साथ वह भी मारा गया है।
इराक के सरकारी मीडिया ने एक वीडियो
जारी किया है, इसे अमेरिकी कार्रवाई का बताया जा रहा है। एक रक्षा अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि बगदादी ने हमले के दौरान खुद को उड़ा लिया।
सुन्नी, शिया समुदाय को सच्चा नहीं मानते। शिया भी सुन्नियों को सच्चा मुस्लिम नहीं मानते। ये सालों या दशकों नहीं बल्कि सदियों से लड़ा जा रहा 'शांतिप्रिय समुदाय' का युद्ध है। इसके ख़त्म होने के भी कोई आसार नज़र नहीं आते।
इस साल मई में मलेशिया पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट के विघटन के बाद अलग हुए तीन 'लोन वुल्फ़' जिहादियों को गिरफ़्तार कर लिया है। मलेशिया पुलिस के अनुसार इस गुट के बाकी जिहादियों को उन्होंने पहले ही धर-दबोचा था
संदिग्ध आतंकियों के पास से 9 मोबाइल फ़ोन, 15 सिम कार्ड, 3 लैपटॉप, 5 हार्ड डिस्क, 7 मेमोरी कार्ड, 3 सीडी/डीवीडी, 2 टैबलेट और 6 पेन ड्राइव बरामद हुए हैं। इसके अलावा, काफी मात्रा में किताबें, मैगज़ीन, बैनर, पोस्टर, नोट्स भी जब्त किए गए हैं।
इंटेलिजेंस सेल से मिली ख़ुफ़िया इनपुट्स के बाद पुलिस ने 47 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है, जिसका नाम असकर है। असकर कुछ ही दिनों पहले अरब से लौटा है। वह स्थानीय लोगों से भी ज्यादा वास्ता नहीं रखता था और पड़ोसियों से बातचीत भी नहीं करता था।
वह दूसरे मज़हबों ही नहीं, उदारवादी मुसलामानों और सूफ़ियों को भी अपशब्द कहता था - उसके लिए सूफ़ी नशेड़ी थे। इस्लामिक पढ़ाई में उसकी रुचि इतनी ज्यादा थी कि उसने केवल कुरान रटने के लिए अरबी का कोर्स किया और 2006 में एक इस्लामिक अध्ययन केंद्र खोल डाला था।
कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की पुष्टि की और साथ ही ये भी बताया कि एसटीएफ ने पश्चिम बंगाल की सीमा के आस-पास के सभी क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी शुरू कर दी है।
हमें पोलिटिकली करेक्ट होकर स्वीकारने में भले ही अनंत काल लग जाए, लेकिन सत्य यही है कि बड़े आतंकी हमलों के केन्द्र में इस्लामी विचारधारा और आईसिस का झंडा है।