दिल्ली की AAP सरकार के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है। इस मामले पर अपनी राय देते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके सामने जो सबूत पेश किए हैं, उसके मुताबिक कन्हैया और अन्य लोगों पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता है।
अर्बन नक्सलियों का साथ देने से लेकर तालिबान से संबंध होने तक के आरोप लग चुके होने के बावजूद Amnesty International सुधर नहीं रहा। अब वह कश्मीर के मुद्दे को भुनाने के चक्कर में कुछ नहीं बल्कि जिहाद का संरक्षण ही कर रहा है।
चिदंबरम तिहाड़ नहीं जाना चाहते इसके लिए उनके वकील कपिल सिब्बल पहले भी एड़ी-चोटी का जोर लगा चुके हैं। लेकिन अब अदालत ने उन्हें 19 सितम्बर तक के लिए जुडिशल कस्टडी में भेजकर उनके तिहाड़ जाने का रास्ता साफ कर दिया है। उन्हें 19 सितम्बर तक तिहाड़ में ही रहना होगा।
'वे (हिंदू) वहाँ पूजा करते थे, लेकिन मस्जिद पर मालिकाना हक वक्फ और मुस्लिम का ही था।' - मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने जैसे ही यह बात कोर्ट में रखी, उन पर SC के जज ने सवाल दागा - क्या हिंदू-मुस्लिम एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं? इसे लेकर इस्लामिक कानून क्या है?
अब प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ के लिए पी चिदंबरम को हिरासत में ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एजेंसी पूर्व वित्त मंत्री को हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चिदंबरम ट्रायल कोर्ट के समक्ष नियमित ज़मानत की अर्ज़ी दाखिल कर सकते हैं।
UAPA क़ानून के तहत मौलाना मसूद अजहर, हाफ़िज़ सईद, दाऊद इब्राहिम, ज़कीउर्रहमान लखवी को आतंकवादी घोषित करने के बाद बाद अमेरिका ने भी भारत के इस रुख़ का समर्थन किया है। अमेरिका का कहना है कि...
आपने इसीलिए रंजीत का नाम नहीं सुना क्योंकि उसकी मॉब लिंचिंग को लेकर किसी ने आवाज़ ही नहीं उठाई। क्यों नहीं उठाई? क्योंकि आरोपितों में मुस्लिम लोग शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपितों में से 2 के नाम अनवर और मिंटू है, जो भाई हैं। लोगों को यह भी बताना पड़ेगा न।
पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने अपने इस विरोध-प्रदर्शन को 'कश्मीर फ्रीडम मार्च' का नाम दिया था। मार्च पार्लियामेंट स्क्वेयर से शुरू होकर भारतीय उच्चायोग की बिल्डिंग तक पहुँचा। मार्च का नेतृत्व यूके की लेबर पार्टी के कुछ सांसदों ने किया।
अस्पतालों, डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों की घोर कमी का संकट दोतरफा है। फिर क्यों 75 फीसदी डॉक्टर जुबानी और 12 फीसदी शारीरिक हिंसा के शिकार? सरकारों की नाकामी का खीझ उन पर क्यों? इस गुस्से को सिस्टम से सवाल करने के लिए बचाकर रखिए।