इरा ने कहा कि गोमांस कुपोषित लोगों के लिए प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए गोमांस पर प्रतिबंध लगाना अनुचित होगा, विशेष तौर पर मुस्लिम समुदाय के लिए। इरा के इन बयानों को लेकर कई लोग हैरत में पड़ गए। कुछ ने इरा को 'हिंदूफोबिक' कहा, तो कुछ ने दूरदर्शन से उनके एक कार्यक्रम के लिए होस्ट के रूप में चुनने को लेकर भी सवाल किया है।
जिला प्रशासन का यह फैसला उस समय आया है जब कुछ दक्षिण पंथी समूहों द्वारा सड़कों पर मुस्लिमों के नमाज पढ़े जाने के विरोध में आरती और हनुमान चालीसा से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाने लगा।
सौरभ कालिया और अन्य भारतीय सैनिकों पर किए गए बर्बर अत्याचार को पाकिस्तान के सैनिकों ने कई बार स्वीकार किया है। हालाँकि, धूर्त पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से कभी यह स्वीकार नहीं किया कि कारगिल युद्ध में उसके सैनिक शामिल थे।
20 जून 1999 की सुबह 3:30 बजे विक्रम बत्रा और उनके साथियों ने प्वाइंट 5410 पर फिर से तिरंगा लहरा दिया। इस जीत के बाद विक्रम बत्रा ने कहा था, “यह दिल माँगे मोर।” विक्रम के जज़्बे को देखते हुए यूनिट ने उनको नया नाम दिया ‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’।
बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा माँ के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपित को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएँ।
ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे समुदाय के लोग उन्हें न तो पूजा करने देते हैं और न ही मंदिर का निर्माण करने दे रहे हैं। विरोध करने पर समुदाय के लोग लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से उन पर हमला कर देते हैं।
भीमा कोरेगाँव की जाँच के दौरान पुणे पुलिस को आरोपित रोना विल्सन और सुरेंद्र गण्डलिक के लैपटॉप से कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं। गौतम नवलखा और कुछ नक्सल समूह साल 2011 से ही पाकिस्तानी आंतकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से सपर्क में थे। इसके अलावा साल 2011 से 2014 के बीच मे गौतम कश्मीर के अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी और शकील बख्शी के भी सम्पर्क में थे।
हर कुत्ते को भौंकने के लिए एक भागती हुई कार चाहिए। आरएसएस वही भागती हुई, चमचमाती कार है जिसे देख कर ये भौंकते हैं क्योंकि इनका एक भी संगठन इस तरह का नहीं बन पाया जो कि अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा को सत्ता तक पहुँचा दे।
बार एवं रेस्तरां के सामने ही जब फिरोज खान पेशाब करने लगता है तो हितेश मूलचंदानी आपत्ति जताते हैं। इस बात से अनजान कि शायद यह उनके जीवन की आखिरी आपत्ति होगी। फिरोज के दोस्त मिलकर पहले तो हितेश का अपहरण करते हैं और बाद में उनकी जली हुई लाश मिलती है।