अमेठी में एक दलित व्यक्ति शशांक को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पीटा। इस दौरान शशांक के साथ-साथ उसके भाई और पत्नी को भी चोटें आईं थीं। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ। अमेठी पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है। लेकिन मीडिया गिरोह में चुप्पी है, स्क्रीन काली नहीं की गई है।
राणा सफ़वी ने अपने लेख में भारत की जीडीपी के आँकड़े दिखा कर मुग़लों को महान साबित करने की कोशिश की है लेकिन उनकी चालाकी पकड़ी गई। हमारे घर में घुस कर हमारे मंदिर तोड़ने वाले मुग़लों की चापलूसी करने वाले कल को जलियाँवाला नरसंहार को भी सही ठहरा सकते हैं।
चेहरे को पत्थर से कुचल दिया। दाहिने हाथ को क्षत-विक्षत किया गया। यह सब इसलिए ताकि पहचान छिपाई जा सके। लेकिन 3 टैटू, सोशल मीडिया प्रोफाइल और मोबाइल लोकेशन ने अपनी ही गर्लफ्रेंड के हत्या आरोपित अशरफ़ शेख़ को पहुँचाया जेल।
"गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक कहानी 'Manibein alias Bibijaan' में बजरंग दल और RSS से संबंधित संगठनों को बेहद ख़राब भूमिका में दर्शाया गया है। RSS और बजरंग दल को गुजरात दंगों में हमलावर के रूप में दिखाया जा रहा है।"
मोदी के जीतते ही ऐसी खबरों में अचानक से इजाफा कैसे हो गया? आखिर आधी खबरें झूठी क्यों साबित हो रही हैं? दर्जन भर मंदिर तोड़े गए, मूर्तियाँ विखंडित हुईं, और हर बार आरोपित या तो 'शांतिप्रिय' है, या अज्ञात।
गाँव-नगर में ढिंढोरा पिटवाने का राज-आदेश दे दिया गया कि युवराज नाराज हैं और कई दिनों से "कॉन्गलेच के छोना बाबू थाना नहीं था रहे।" तमाम विश्लेषकों के माथे बल पड़ गया। राजनीति के गलियारों में हलचल मच गई।
कारवाँ के कार्यकारी सम्पादक विनोद के. होज़े ने लंदन में भारत-विरोधी प्रेज़ेंटेशन दिया। उन्होंने दावा किया कि हिंदुस्तान के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि "सैकड़ों ईसाईयों की हत्या हो रही है।" और "1984 का सिख हत्याकांड भी आरएसएस का रचा हुआ था।"
“हमारे पास उनकी लिस्ट तैयार है और वे हमारे सम्पर्क में हैं।” मुकुल रॉय के मुताबिक़, बीजेपी में शामिल होने वाले ये 107 विधायक मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा), कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी (TMC) से हैं।
बात लिखती हैं दिल्ली के ओखला स्थित भारत के सबसे बड़े सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की और फोटो लगाती हैं कैलिफोर्निया की! फिर तुलना करती हैं गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से! यह किस तरह का प्रोपेगेंडा फैला रहीं हैं मेम साब?
पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब जैसे कई इस्लामिक देश ऐसे हैं, जिन्होंने मुस्लिमों पर हो रहे इन कथित अत्याचारों पर चुप्पी साध रखी है। इसकी वजह शायद चीन का इन देशों में भारी निवेश है। चीनी निवेश इन देशों को आर्थिक संकट से उबारने में बहुत महत्वपूर्ण है।