Tuesday, September 22, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे बिहारी पत्रकारों, नीतीश कुमार की काहिली को डिफेंड कर रहे हो? इसी बाढ़ में...

बिहारी पत्रकारों, नीतीश कुमार की काहिली को डिफेंड कर रहे हो? इसी बाढ़ में डूब क्यों नहीं जाते?

पत्रकारों का शायद सबसे बड़ा प्रतिशत बिहारियों का होगा लेकिन सारे अख़बारों पर महज ‘कहाँ क्या हुआ, कितने लोग मरे, कितने बह गए, किस जिले का कितना हिस्सा डूबा और मुख्यमंत्री ने आज क्या बयान दिया’ यही चल रहा है। कौन ज़िम्मेदारी लेगा?

बालिका गृह कांड किस स्तर का होगा, और उसमें किस स्तर के लोग अपराधी होंगे इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि मीडिया में इसकी फॉलोअप स्टोरी नहीं मिलती और सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर बिहार सरकार को लताड़ लगानी पड़ती है कि इस पर बात आगे क्यों नहीं बढ़ रही। एक ऐसा भयावह कांड जो भारत के हर जिले के हर ऐसे शेल्टर होम या बालिका गृह की कहानी हो सकती है, वो कुछ दिनों के लिए राष्ट्रीय खबर बनी, लेकिन फिर चर्चा से गायब हो गई। मैं कोई आँकड़े नहीं दूँगा क्योंकि उसकी ज़रूरत नहीं है। बच्चियों को सहारा देने के नाम पर उनका यौन शोषण व्यवस्थित तरीके से करवाने की भयावहता शायद आँकड़ों की मोहताज नहीं।

चमकी बुखार या इन्सेम्फलाइटिस से मरे हुए सौ से ज्यादा बच्चों ने भारतीय मीडिया की ड्रामेबाजी तो देख ली, लेकिन जिनसे सवाल होने थे, जो फॉलोअप किया जाना था वो नहीं किया गया। लगातार एंकर स्वयं ही सर्वज्ञ बन कर बताते रहे कि किसका इलाज होना चाहिए, किसका नहीं, लेकिन नितीश फिर बच गए। सामर्थ्यवान हमेशा ही पीछे हटते रहे और सोशल मीडिया ने अपने स्तर से बहुत कोशिश की। ये मुद्दा भी बहुत भयावह था, लेकिन नितीश को क्लीन चिट मिल गई।

शिक्षकों की सैलरी का मुद्दा तो जब से पैदा हुआ हूँ तब से चल ही रहा है। बिहार के स्कूलों में आख़िर शिक्षक किस मोटिवेशन से पढ़ाएगा अगर आप उसकी सैलरी साल और छः महीने पर देंगे? शिक्षकों के प्रति लालू भी उदासीन था, नीतीश भी कुछ अलग नहीं। अब प्रदेश के हजारों शिक्षक पटना पहुँच कर घेराव करने की बातें कर रहे हैं। शिक्षा का संकट भले ही स्वास्थ्य और बाढ़ से भयावह न हो, लेकिन कम भयावह भी नहीं। पत्रकार लोग बस इसकी रिपोर्टिंग करते हुए खानापूर्ति करके डेट बता देते हैं कि हड़ताल कब होगी। ये कभी मुद्दा बन ही नहीं पाया।

उसके बाद का मुद्दा वो मुद्दा है जो हर साल बिहार को तबाह कर जाता है, लेकिन सरकार ज्यों की त्यों बनी रहती है। विभागों से ‘सारे तटबंध सही हैं’ का लेख हर महीने फाइलों में खिसकता रहता है, लेकिन बारिश होते ही दस जगहों से वह टूटते हैं, और वही फाइल ये सूचना देती है कि टूट गई। आखिर कौन बनाता है यह रिपोर्ट? हर महीने दुरुस्त रहने वाला तटबंध अचानक से टूट कैसे जाता है? फाइलों में तो तटबंध हमेशा दुरुस्त ही रहेंगे, क्योंकि फाइल में पानी नहीं घुसता।

- विज्ञापन -

उसके बाद अगर आप इस बाढ़ की रिपोर्टिंग देखिएगा तो पता चलेगा कि लोग छः कॉलम में जलमग्न, जलराशि, मंजर, भयावह स्थिति आदि शब्दों का प्रयोग कर फोटो छाप देते हैं और बताते हैं कि कितना इलाका चपेट में आया हुआ है। इसके आगे की बात गायब हो जाती है। बिहारी पत्रकार, जो कि पत्रकारिता के उद्योग में रैंडमली ढेला तीन बार फेंकने पर एक बार अपने सर पर तो लेगा ही, वो ज्ञान दे रहा है कि इसमें जिम्मेदारी कलेक्टर कि है। ये वही पत्रकार हैं जो अपनी राजनैतिक विचारधारा से विपरीत विचार रखने वाले लोगों से घोड़े की टाँग टूटने पर इस्तीफा माँग लेते हैं।

ये वही पत्रकार समूह है जो गौरी लंकेश की हत्या पर दिल्ली के प्रेस क्लब में जरूर शिरकत करता है लेकिन बिहार के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या पर चुप रहता है। यही कारण है कि नीतीश को ऐसे दिखाया जाता है जैसे उनके बिना बिहार बंद हो जाएगा या फिर वो जो कर रहे हैं वही सर्वोत्तम समाधान है। बिहार में बाढ़ का आना तय है, ये बात सबको पता है लेकिन इसका समाधान कुछ नहीं।

समाधान शायद इसलिए नहीं है क्योंकि बाढ़ सरकारी महकमे के अफसरों और नेताओं के लिए उत्सव है। ये वो समय है जब राहत पैकेज के रूप में भ्रष्टाचार का पैकेज आता है। आखिर लगभग पंद्रह साल से सत्ता में रही पार्टी इस समस्या का कोई हल ढूँढने में विफल क्यों रही है? अगर कोसी द्वारा अपने पुराने बहाव क्षेत्र में वापस आने वाले साल को छोड़ दिया जाए, तो बाकी के हर साल एक ही समस्या कैसे आ जाती है? इस पर हवाई दौरा करने से क्या होता है? या हम यह मान लें कि दुनिया के किसी इलाके में, या भारत के ही किसी भी इलाके में बाढ़ को लेकर कोई सही समाधान नहीं आया है?

पत्रकारों का शायद सबसे बड़ा प्रतिशत बिहारियों का होगा लेकिन सारे अख़बारों पर महज ‘कहाँ क्या हुआ, कितने लोग मरे, कितने बह गए, किस जिले का कितना हिस्सा डूबा और मुख्यमंत्री ने आज क्या बयान दिया’ यही चल रहा है। कौन ज़िम्मेदारी लेगा, तटबंध कैसे टूट गए, हर साल बचाव कार्य का कितना पैसा कहाँ गया, इसका ब्यौरा नहीं दिखता। आख़िर बाढ़ में राहत पैकेज का करोड़ों रूपया हर साल किस हालत में बहा दिया जाता है कि अगले साल फिर वही समस्या हो जाती है?

पता नहीं इन लोगों को नीतीश ने घुट्टी पिला रखी है या ये भूल गए कि बिहार के ही हैं और बाढ़ की भयावहता से दूर भले हैं, अनजान नहीं, इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए और सवाल पूछे जाएँ। लेकिन राजनैतिक उथल-पुथल के दिनों में शायद नितीश के पाला बदलने के अंदेशे में ये समझ नहीं पा रहे हैं कि विरोध करें तो किन शब्दों में करें। कई लोग जो भाजपा के मुखर विरोधी रहे हैं वो भी ‘सॉफ़्ट’ हो गए हैं और बता रहें हैं कि नेताओं को छोड़ कर बाकी सब ज़िम्मेदार हैं। संस्थानों की विचारधारा के हिसाब से चलने की बात और है, लेकिन फेसबुक पर पोस्ट तो लिखे जा सकते हैं?

हर स्तर पर सिर्फ सूचनाएँ देना लेकिन किसी भी तरीके से नेतृत्व को ज़िम्मेदार न ठहराना, बल्कि डिफेंड करने लगना अलग स्तर की धूर्तता है। इतना जोड़-घटाव तो लोग चुनाव के समय भी नहीं करते जितना हमारे बिहारी पत्रकार शायद इस आपदा के वक्त कर रहे हैं जो हर स्तर पर बिहार को शब्दशः और वैसे भी भीतर से ही काटे जा रही है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Editorial Deskhttp://www.opindia.com
Editorial team of OpIndia.com

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

D मतलब दीपिका पादुकोण ही, तलब करने की तैयारी में एनसीबी, मैनेजर को पहले ही भेज चुकी है समन

कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ड्रग चैट जिन लोगों के बीच बात हो रही थी, उसमें D का मतलब दीपिका पादुकोण ही है।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

सेना में महिलाओं को नया मोर्चा: नौसेना के युद्धपोत पर पहली बार तैनाती, राफेल भी उड़ाएँगी

राफेल स्क्वाड्रन में अब एक महिला पायलट की भी एंट्री हुई है। वहीं नौसेना ने पहली बार दो महिला अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनात किया है।

₹1100 अरब सिर्फ एक साल में, दाऊद का Pak फाइनेंसर अल्ताफ ऐसे करता है आतंक और ड्रग तस्करों की फंडिंग

“अल्ताफ खनानी तालिबान के साथ लेन-देन के मामले में शामिल था। लश्कर-ए-तैय्यबा, दाऊद इब्राहिम, अल कायदा और जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध थे।”

ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच छेद, आँख-नाक से खून; हाथ मुड़े: आखिर दिशा सालियान के साथ क्या हुआ था?

दिशा सालियान की मौत को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब एंबुलेंस ड्राइवर ने उनके शरीर पर गहरे घाव देखने का दावा किया है।

प्रचलित ख़बरें

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

संघी पायल घोष ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया – जया बच्चन

जया बच्चन का कहना है कि अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पायल घोष ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया है।

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

पक्के 'फेमिनिस्ट' अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

प्रेगनेंसी टेस्ट की तरह कोरोना जाँच: भारत का ₹500 वाला ‘फेलूदा’ 30 मिनट में बताएगा संक्रमण है या नहीं

दिल्ली की टाटा CSIR लैब ने भारत की सबसे सस्ती कोरोना टेस्ट किट विकसित की है। इसका नाम 'फेलूदा' रखा गया है। इससे मात्र 30 मिनट के भीतर संक्रमण का पता चल सकेगा।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

सोशल मीडिया में एक नई चर्चा के तूल पकड़ने के बाद कई यूजर्स सोनू सूद की मंशा सवाल उठा रहे हैं। कुछ ट्विटर अकाउंट्स अचानक गायब होने पर विवाद है।

माही, ऋचा, हुमा… 200 से भी ज्यादा लड़कियों से मेरे संबंध रहे हैं: पायल घोष का दावा- अनुराग कश्यप ने खुद बताया था

पायल घोष ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि अनुराग कश्यप के 200 लड़कियों से संबंध थे और अब यह संख्या 500 से ज्यादा हो सकती है।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

D मतलब दीपिका पादुकोण ही, तलब करने की तैयारी में एनसीबी, मैनेजर को पहले ही भेज चुकी है समन

कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ड्रग चैट जिन लोगों के बीच बात हो रही थी, उसमें D का मतलब दीपिका पादुकोण ही है।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

ऑपइंडिया का असर: ‘UN लिंक्ड’ संगठन से प्रशंसा-पत्र मिलने वाला ट्वीट TMC ने डिलीट किया

ऑपइंडिया की स्टोरी के बाद, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने बंगाल सरकार को मिले प्रशंसा-पत्र वाला ट्वीट चुपके से डिलीट कर दिया है।

‘क्या तुम्हारे पास माल है’: सामने आई बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस के बीच हुई ड्रग चैट

कुछ बड़े बॉलीवुड सितारों के बीच की ड्रग चैट सामने आई है। इसमें वे खुलकर ड्रग्स के बारे में बात कर रहे हैं।

सेना में महिलाओं को नया मोर्चा: नौसेना के युद्धपोत पर पहली बार तैनाती, राफेल भी उड़ाएँगी

राफेल स्क्वाड्रन में अब एक महिला पायलट की भी एंट्री हुई है। वहीं नौसेना ने पहली बार दो महिला अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनात किया है।

₹1100 अरब सिर्फ एक साल में, दाऊद का Pak फाइनेंसर अल्ताफ ऐसे करता है आतंक और ड्रग तस्करों की फंडिंग

“अल्ताफ खनानी तालिबान के साथ लेन-देन के मामले में शामिल था। लश्कर-ए-तैय्यबा, दाऊद इब्राहिम, अल कायदा और जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध थे।”

महाराष्ट्र के धुले से लेकर यूपी के कानपुर तक, किसान ऐसे कर रहे हैं कृषि बिलों का समर्थन

कृषि सुधार बिलों पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम के प्रोपेगेंडा के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों के किसान इसका समर्थन कर रहे हैं।

रोहिणी सिंह, रबी में भी होता है धान: यह PM पर तंज कसने से नहीं, जमीन पर उतरने से पता चलता है

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलावा तमिलनाडु में भी रबी सीजन में बड़े स्तर पर धान की खेती की जाती है। इस साल अक्टूबर-नवंबर में सरकार 75 लाख टन 'रबी राइस' के खरीद की योजना बना रही है।

प्रशांत महासागर में अमेरिकी नौसैनिक बेस पर चीन के H-6 ने बरसाए बम? PLAAF ने जारी किया हमले का नकली Video

चीन ने प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए एक नकली वीडियो जारी किया है। इसमें चीनी वायु सेना के परमाणु सक्षम H-6 बॉम्बर्स को प्रशांत महासागर स्थित अमेरिकी नौसैनिक बेस गुआम पर एक बम गिराते दिखाया गया है।

हमसे जुड़ें

263,159FansLike
77,961FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements