विषय

Left

‘ट्रम्प के पैंट खोलते ही घुटनों पर भारत माता’: गालीबाज कॉमरेड नाम्बियार के पीछे पड़ी मुंबई पुलिस, अकाउंट लॉक

अप्रैल, 2020 को किए गए एक ट्वीट में 'कॉमरेड' अरुण नाम्बियार ने लिखा है- "तो ट्रम्प के अपनी पैंट की चेन खोलते ही भारत माता अपने घुटनों पर झुक गई?" यह ट्वीट अरुण नाम्बियार ने डोनाल्ड ट्रम्प के भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की माँग करने के बाद किया है।

मदरसों में पुलिस से छिपा कर रखे गए हैं बच्चे: मीडिया ने दिखाया तो वामपंथी कविता कृष्णन हुई खफा

मदरसों में छात्रों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कोरोना जैसी महामारी के बीच उन्हें जानवरों की तरह रखा जा रहा है। लेकिन वामपंथी कविता कृष्णन चाहती हैं कि मदरसों की इस हरकत पर मीडिया चुप्पी साध ले और बच्चों को मरने दे।

आपबीती: मुझे SFI नेता ने कहा ‘भाजपा’ वालों के साथ सोओ, बाद में विक्टिम कार्ड खेलना, हम देख लेंगे

इसके बाद मयाबन ने उन्हें डराना शुरू कर दिया। अगर वो किसी से बात कर रही होतीं तो मयाबन गांगुली आ धमकता और और उनके साथी को धक्का देकर अजीब से व्यवहार करता। वो बार-बार प्रियंका को घूरता रहता। एसएफआई वालों को पता था कि प्रियंका डरी हुई हैं, फिर भी वो कॉल कर-कर के धमकी देते थे।

प्यारे मोदी-विरोधी चिलगोजों, PM ने ताली बजाने को कहा तो तुम्हारे अंतःपुर में खुजली क्यों हो रही है?

ये वह समाज है जिससे मोदी कह दें कि विष्ठा मलद्वार से करनी चाहिए तो वह अपने मुख से करने लगेगा। इनका ऑक्सीजन भी मोदी-विरोध है। इनका गड़बड़ाया पाचन तंत्र भी मोदी को गाली देकर दुरुस्त होता है। इस समाज के गाँजा और सेक्स लाइफ का एक्स फैक्टर है मोदी विरोध।

मानवता के हत्यारे वामपंथियों की जगह भारतीयता के अग्रदूत सावरकर के नाम JNU में मार्ग के मायने

आज JNU में एक मार्ग का नाम सावरकर जी के नाम पर रखा जाना निसंदेह एक दूरदर्शितापूर्ण कदम है। यह कदम उस स्थान पर अत्यावश्यक हो जाता है, जहाँ बैठकर स्वतन्त्रता उपरांत एक खास इतिहासकारों के वर्ग ने भारतीय मूल्यों को धूलि-धूसरित करने का कार्य करते हुए इतिहास की मनगंढ़त व्याख्या हमारे समक्ष रखी।

‘संघी केजरीवाल की खाकी चड्डी दिख गई’: अंकित शर्मा के परिवार को मुआवजा मिलने से लिबरल गिरोह खफा

कर्नाटक कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष श्रीवत्स ने लिखा कि उस फैजान का क्या, जिसे दिल्ली पुलिस ने 'लाठी से पीट-पीट कर मार डाला?' उन्होंने दावा किया कि बाकी के 40 पीड़ित परिवारों को यूँ ही छोड़ दिया गया है। इसी तरह बाकी इस्लामी कट्टरपंथी भी गुस्से में नज़र आए।

विकिपीडिया का एडिटर जो मुस्लिम दंगाइयों को बचाने में लगा है: दिल्ली दंगे से लेकर ‘चौकीदार चोर है’ तक

वो आइआइटी कानपुर से पढ़ा हुआ है और फ़िलहाल इंटेल की बेंगलुरु ऑफिस में कार्यरत है। उसने दीनदयाल उपाध्याय के नाम से 'पंडित' हटा दिया। उसने दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन का नाम हटा दिया। वो लगातार ऐसी एडिटिंग कर के हिन्दू-घृणा से ग्रसित लेख बना रहा है।

तुम देखोगे? हम दिखाएँगे…: लिबरलों, वामपंथियों के लिए दंगा साहित्य से उपजी एक कविता

ये हरा-हरा सा एक फिल्टर जो तुमने चढ़ा कर रक्खा है उससे भगवा छँट जाता है हिन्दू गायब हो जाता है दिखता है बस इमरान-जुबैर अंकित-दीपक छुप जाता है ओ वामपंथ के रखवाले ओ लम्पट लिबरल तुम साले! दिल्ली दंगो की व्यथा सुनाती इस कविता को पढ़ें, सुनें औरों तक पहुँचाएँ। आप इसे अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर आगे बढ़ाएँ।

ईद पर मटन ठीक, क्रिसमस पर ‘गोमूत्र नहीं शराब पियो’, पर महाशिवरात्रि पर निकल रहा है लेखिका का ज्ञान

ईद पर मटन-बिरयानी के गुलछर्रे उड़ाने वाली रुचि क्रिसमस पर 'भक्तों' को 'गाय के पेशाब की जगह शराब पीने' की सलाह देती हैं। जैसे ही महाशिवरात्रि आती है, रुचि के अंदर का सामाजिक कार्यकर्ता जाग उठता है और वो फ़र्ज़ी ज्ञान देने लगती हैं। सारे सलाह हिन्दुओं के लिए ही हैं क्या?

कन्हैया पर चप्पल फेंकने वाले लड़के को वामपंथियों ने किया लिंच, बेहोश होने तक पीटा

ऑपइंडिया किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा नहीं देता। चप्पल मारना भले ही किसी की खीझ की ‌अभिव्यक्ति हो सकती है, वो एक विरोध का तरीका हो सकता है, लेकिन यह तरीका सही नहीं है, भले ही देश विरोधी वामपंथी ही इसका शिकार क्यों न हो रहे हों।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें