1 सितंबर 2019 से लागू हुए नए ट्रैफिक रूल के बाद से चालान के रोजाना नए रिकॉर्ड बन और टूट रहे हैं। दिल्ली से लेकर अन्य राज्यों में कई भारी-भरकम चालान काटे गए जो मीडिया में छाए रहे जिसे देखकर कुछ राज्य सरकारों ने पहले ही जुर्माने की राशि में बदलाव कर दिया था।
"यह न केवल एक मोटर व्हीकल एक्ट है, बल्कि यह एक सड़क सुरक्षा बिल है। मेरा मानना है कि इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इस विधेयक का पारित होना उन लोगों के लिए एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने दुर्घटनाओं में अपनी जान गँवाई।"
कुल मिलाकर देखें तो आंतरिक कलह, समाज के सभी वर्गों के बीच गडकरी की स्वीकार्यता और सबसे अव्वल उनके विकास कार्यों की आड़ में दबी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की नाराज़गी के कारण पार्टी शायद पहले से ही इस सीट को हारी हुई मान कर चल रही है।
"शारीरिक रूप से भले ही कॉन्ग्रेसी कार्यकर्तागण अपनी पार्टी के लिए प्रचार-प्रसार करें लेकिन मानसिक रूप से वो सभी मेरे साथ हैं। वो मुझे फोन करके बताते हैं कि मैं लोकसभा चुनाव जरूर जीतूँगा। उनका कहना है कि वह मेरे साथ हैं।"
गडकरी ने न केवल विकास न होने के दावे पर सवाल उठाया, बल्कि इशारों में यह भी पूछ लिया कि क्या प्रियंका गाँधी यूपीए सरकार के समय में अपने हिंदुत्व का प्रदर्शन कर पातीं?
अभी हाल ही में हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर चहुँओर से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गडकरी ने कहा कि पाकिस्तान जानेवाले पानी को रोक कर अब यमुना में लाया जाएगा।
गडकरी ने अपने ट्वीट में लिखा, "मोदी जी फिर प्रधानमंत्री बनेंगे और हम मजबूती के साथ देश को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन, आप भविष्य में समझदारी और जिम्मेदारी के साथ बर्ताव करेंगे यह उम्मीद करता हूँ।”
दिवास्वप्न देखना और कॉन्पिरेसी थ्योरी में यकीन करना कॉन्ग्रेस पार्टी का एक पार्ट टाइम पेशा बनता जा रहा है, और शायद इस तरह की संभावनाओं पर भविष्यवाणियाँ कर के कॉन्ग्रेस के नेता अपने लिए 2019 के आम चुनावों के बाद रोज़गार तलाश रहे हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता गडकरी ने रविवार को नागपुर में महिला स्वयं सेवा समूह द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा- "मैं महिला आरक्षण का विरोध नहीं करता लेकिन जाति और धर्म के आधार पर की जाने वाली राजनीति का सख़्त विरोधी हूँ।"