Wednesday, August 12, 2020
Home बड़ी ख़बर प्यारे बुद्धिजीवियो! नितिन गडकरी उड़ता तीर है, इसे लेकर बुरे फँसोगे

प्यारे बुद्धिजीवियो! नितिन गडकरी उड़ता तीर है, इसे लेकर बुरे फँसोगे

नितिन गडकरी अगर सत्ता में रहते हुए शासन-प्रशासन की कमियों के बारे में बात करते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए एक बेहतरीन सबक है और हर राजनीतिक दल को इससे सीख लेनी चाहिए।

राजनीति में और खासकर विपक्ष में इन दिनों एक हल्ला उठा हुआ है और वो है भाजपा के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर। महागठबंधन से विभीषण की तरह लतियाए जाने के बाद अपने प्रधानमंत्री पद के चेहरे लिए तरसती और जूझती हुई ये पार्टी, इस मामले में ज्यादा मशगूल है कि सत्ताधारी पार्टी में क्या चल रहा है और क्या नहीं?

पहला सवाल तो यह है कि क्या भारत में आज विपक्ष की मात्र यह भूमिका रह गई है कि वो अपने घर में फैले रायतों को समेटने के बजाए, पड़ोस में चल रहे हो-हल्ला पर कान रखता है? इस तरह से इसे विपक्ष कम और मोहल्ले की उस मौसी का नाम देना ज्यादा बेहतर होगा, जिसे मोहल्ले भर के एक-एक घर की कानाफूसी से जुटाई हुई तमाम जानकारियों में रूचि रहा करती है।

कॉन्ग्रेस शासनकाल में वित्त मंत्री रह चुके पी चिदमबरम का मानना है कि नितिन गडकरी नरेंद्र मोदी को चुनावों के बाद चुनौती देने वाले हैं। यानी, आगामी आम चुनाव में भाजपा बहुमत जुटाने में विफल रहती है तो प्रधानमंत्री पद के लिए नितिन गडकरी अपनी दावेदारी ठोकेंगे।

दिवास्वप्न देखना और कॉन्सपिरेसी थ्योरी में यकीन करना कॉन्ग्रेस पार्टी का एक पार्ट टाइम पेशा बनता जा रहा है, और शायद इस तरह की संभावनाओं पर भविष्यवाणियाँ कर के कॉन्ग्रेस के नेता अपने लिए 2019 के आम चुनावों के बाद रोज़गार तलाश रहे हैं।

- विज्ञापन -

पार्टी अध्यक्ष मुँगेरीलाल ही जब सोते-जागते स्वप्न देखने में मशगूल हैं तो फिर सिपहसालारों से तो यह उम्मीद की ही जानी चाहिए। उनके सपनों के किस्से और कहानियाँ मैं पहले भी बता चुका हूँ।

क्या नरेंद्र मोदी को सिर्फ इसलिए नकार दिया जाना चाहिए, क्योंकि वो जनता के मर्म को जानते और समझते हैं?

तीन दशक तक सिंगापुर के प्रधानमंत्री रहे और सिंगापुर के संस्थापक माने जाने वाले ली कुआन यू ने नोटबंदी के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था को जिस प्रधानमंत्री की जरुरत थी, वो उसे मिल चुका है। उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी देश की जनता की नब्ज़ को समझते हैं और उस अनुसार काम भी करते हैं। साथ ही यह भी कहा था की भारत के नागरिकों की विशेषता है कि पहले तो ये लोग किसी काम के लिए हामी नहीं भरते, लेकिन जब एक बार रास्ते पर चल पड़ते हैं तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखते।

पिछले 4 सालों में जो एक बात सबसे ज्यादा गौर करने लायक रही है वो ये कि विपक्ष लगातार भाजपा की बिछाई पिच पर ही क्रिकेट खेलने उतरा है और नरेंद्र मोदी ऐन समय पर गुगली फेंक देते हैं जिससे विपक्ष की तमाम रणनीति तितर-बितर हो जाती है और वो पगबाधा होकर पवेलियन लौट जाता है।

वंशवाद और चमचागीरी में लिप्त कॉन्ग्रेस सरकार अपने वैचारिक और बुद्दिजीवी ब्रिगेड को मोर्चे पर लाने के बजाए निरंतर एक ऐसे प्यादे पर दाँव लगाने की फ़िराक में लगी रहती है, जिसे कुछ दिन पहले ही वो प्रियंका गाँधी को राजनीति में लाकर ‘जोकर’ साबित कर चुकी है। इसके लिए भी अगर वो किसी दिन नरेंद्र मोदी को ही जिम्मेदार ठहरा दें, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। साथ ही, इतिहास गवाह है कि इस वंशवाद, शासन करने और सत्ता अपने हाथों में रखने की शौक़ीन यह पार्टी, अपने बुद्दिजीवी वर्ग को कभी घोटालों में बलि का बकरा बनाती आई है या फिर उन्हें किसी ना किसी तरह से पार्टी की मुख्यधारा से दूर कर के उनके पँख कुरेदते आई है।

राहुल गाँधी और उनकी गोदी मीडिया ये सत्य बखूबी जानती है कि वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी जीत उनके कार्यकाल में एक भी घोटाले का न होना है। यही वजह है कि मुद्दों की कमी के चलते यह गिरोह प्रधानमंत्री को कभी तानाशाह तो कभी फासीवादी कहता नज़र आता है।

नितिन गडकरी को लेकर खेले जा रहे इस दाँव के लिए मुद्दों के लिए भटकती हुई विपक्ष की आत्मा ही जिम्मेदार है। लेकिन मेरा मानना है कि नितिन गडकरी के बयानों को मुद्दा बनाना उस संस्था के लिए स्वाभाविक है, जो खुद एक परिवार की दकियानूसी और चापलूसी में संलग्न रहने का आदी है।

कॉन्ग्रेस को स्वतंत्र विचार रखने वाले लोग सिर्फ और सिर्फ बगावती नज़र आते हैं क्योंकि उनके साथ यही होता आया है। नितिन गडकरी जैसा व्यक्तित्व हर हाल में भाजपा की धरोहर है और ये पार्टी में मौजूद लोकतंत्र को दर्शाता है, ना कि बगावत को। लेकिन अगर कॉन्ग्रेस यही बात समझ जाती तो आज देश की इतनी पुरानी पार्टी की कहानी कुछ और होती।

ये भाजपा ही है, जिसके नेता को एक ऐसे व्यक्तित्व के ख़िलाफ़ बोलने की आज़ादी है जिसके समर्थन में लोकतंत्र का एक बड़ा वर्ग मौज़ूद है, जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी के हालात ये हैं कि जिसने भी शीर्ष नेतृत्व के विरुध्द आवाज़ उठाई उसे ही ‘उठा’ लिया गया। नीतिन गडकरी इस बात का उदाहरण हैं कि BJP में कम से कम कोई तो है भी जो मोदी को कह सके कि ‘हटो’, वरना कॉन्ग्रेस में तो जिस-जिस ने ‘हटो’ कहा, उसे ही ‘हटा’ देने की प्रथा रही है।

कॉन्ग्रेस का असल दर्द:

क्योंकि मोदी सरकार के दौरान कॉन्ग्रेस को आए दिन घोटाले, जनता पर आँसू गैस छोड़ने, रबड़ की गोलियाँ जैसे काण्ड देखने को नहीं मिल रहे हैं, इसलिए अब लीडरशिप में फूट डालने के लिए नई नौटंकी रच रही है। इसके लिए वो यदा-कदा उस गोदी मीडिया का भी सहारा लेते दिख जाता है, जो अब धीरे-धीरे उभरता हुआ कहानीकार बन चुका है। ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ के ‘जातिवाचक कुलपति’ तो इनके पास हैं ही।

नितिन गडकरी वही काम कर रहे हैं, जो एक मंत्रिमंडल से उम्मीद की जा सकती है। वो अगर सत्ता में रहते हुए शासन-प्रशासन की कमियों के बारे में बात करते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए एक बेहतरीन सबक है और हर राजनीतिक दल को इससे सीख लेनी चाहिए। यह हर मायने में प्रशंसा का विषय है, ना की मौकापरस्त होकर नरेंद्र मोदी सरकार को कोसने का।

प्यारे कट्टर विपक्षी साथियों, नींद से जाग जाइए और इस हक़ीक़त को समझकर स्वीकार करिए कि इस देश के नागरिक का असल रोना लोकतंत्र, पितृसत्ता या अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे प्रोपैगैंडा नहीं, बल्कि एक मजबूत विपक्ष की माँग है। बेहतर होगा कि आप ‘सरला मौसी’ होने के बजाए ,एक बेहतर राजनीति के विकल्प बनने पर ध्यान दें।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भूमिपूजन पर भगवा झंडे-पटाखे दिए जलाना डरा रहा है मुसलमानों को : शन्नो की शिकायत पर ‘वायर’ की तरफदारी

स्थानीय लोगों ने बताया कि सब कुछ सामान्य ही था लेकिन इसके कुछ दिन बाद मुस्लिम पत्रकारों ने वहाँ मौजूद परिवारों से बातचीत कर इसे मजहबी रंग देने का प्रयास किया।

सचिन पायलट की वापसी से और गहराया संकट: फूट पड़ी कॉन्ग्रेस में, थूका-चाटा कॉन्ग्रेसियों ने, लेकिन दोषी कौन है? भाजपा…

ये झटका किसे है? सचिन पायलट अब राजस्थान में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नहीं रहे। न ही वो अब राज्य के उप-मुख्यमंत्री हैं। महीने भर उनका अपमान हुआ। कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें भला-बुरा कहा।

शेहला रशीद के लिए मेडिकल किट बुर्का है, और मास्क हिजाब… बकैती से कुप्रथाओं का कर रही समर्थन

शेहला रशीद बुर्के और नकाब का समर्थन करते हुए कहती हैं, "अंकल अब तो पूरी दुनिया बुर्का (पीपीई) और निकाब (मास्क) पहन रही है। शांत हो जाओ।"

‘किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़े ही है’ के शायर राहत इंदौरी का निधन, इंटरनेट पर प्रशंसक सदमे में

मशहूर शायर राहत इंदौरी का कोरोना वायरस संक्रमण के कारण निधन हो गया है। उनका कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था।

राम मंदिर के साथ Happy Independence Day का पोस्टर: पुलिस ने उतार दिया हैदराबाद में, BJP ने की जाँच की माँग

"पोस्टर में लिखे जिस नारे को लेकर विवाद हो रहा है, वह भगत सिंह ने कहा था और उनके नारे को पोस्टर में लिखना किसी भी तरह से अनुचित नहीं है।"

PTI का पकड़ा गया झूठ: PM मोदी के कोरोना आँकड़ों से गायब किया शब्द, बदल गए मायने

PTI जैसी संस्था सोशल मीडिया पर पड़ती गाली को देख कर अपना ट्वीट डिलीट भी कर सकती है। इसलिए उसका ट्वीट नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट से...

प्रचलित ख़बरें

मस्जिद के अवैध निर्माण के खिलाफ याचिका डालने वाले वकील पर फायरिंग, अतीक अहमद गैंग का हाथ होने का दावा

प्रयागराज में बदमाशों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अभिषेक शुक्ला पर फायरिंग की। हमले में वे बाल-बाल बच गए।

बुर्के वाली औरतों की टीम तैयार की गई थी, DU के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने दंगों का दिया था मैसेज: गुलफिशा ने उगले राज

"प्रोफेसर ने हमे दंगों के लिए मैसेज दिया था। पत्थर, खाली बोतलें, एसिड, छुरियाँ इकठ्ठा करने के लिए कहा गया था। सभी महिलाओं को लाल मिर्च पाउडर रखने के लिए बोला था।"

ऑटो में महिलाओं से रेप करने वाले नदीम और इमरान को मारी गोली: ‘जान बच गई पर विकलांग हो सकते हैं’

पूछताछ के दौरान नदीम और इमरान ने बताया कि वे महिला सवारी को ऑटो रिक्शा में बैठाते थे। बंधक बनाकर उन्हें सुनसान जगह पर ले जाते और बलात्कार करते थे।

महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ में किया जाएगा हिन्दुओं को बदनाम: आश्रम के साधु के ‘असली चेहरे’ को एक्सपोज करेगी आलिया

21 साल बाद निर्देशन में लौट रहे महेश भट्ट की फिल्म सड़क-2 में एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा, आलिया द्वारा उसके 'काले कृत्यों' का खुलासा...

मस्जिद में कुरान पढ़ती बच्ची से रेप का Video आया सामने, मौलवी फरार: पाकिस्तान के सिंध प्रांत की घटना

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त स्थित कंदियारो की एक मस्जिद में बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित मौलवी अब्बास फरार बताया जा रहा है।

लटका मिला था भाजपा MLA देबेन्द्र नाथ रॉय का शव: मुख्य आरोपी माबूद अली गिरफ्तार, नाव से भागने की थी योजना

भाजपा MLA देबेन्द्र नाथ रॉय के कथित आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपित माबूद अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। नॉर्थ दिनाजपुर के हेमताबद में...

रिया चक्रवर्ती ने ‘AU’ को किए 44 कॉल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत से पहले और बाद भी किए गए कई कॉल: रिपोर्ट्स

TrueCaller में भी यह नंबर SU के नाम से रजिस्टर्ड है। 44 आउटगोइंग कॉल और 2 एसएमएस के अलावा 17 इनकमिंग कॉल थे। बॉलीवुड अभिनेता की मृत्यु से एक दिन पहले 13 जून को भी........

भूमिपूजन पर भगवा झंडे-पटाखे दिए जलाना डरा रहा है मुसलमानों को : शन्नो की शिकायत पर ‘वायर’ की तरफदारी

स्थानीय लोगों ने बताया कि सब कुछ सामान्य ही था लेकिन इसके कुछ दिन बाद मुस्लिम पत्रकारों ने वहाँ मौजूद परिवारों से बातचीत कर इसे मजहबी रंग देने का प्रयास किया।

‘मैं कहाँ चला जाऊँ, राजदीप? मैं तो गर्त में हूँ!’ भूमिपूजन पर विलाप करते ओवैसी के जवाब पर राजदीप हुए ट्रोल

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “राजदीप, आप मुझे कहाँ ले जाना चाहते हो? मैं पहले से ही गर्त में हूँ।” उन्होंने पूरे मामले पर 'धर्मनिरपेक्ष दलों' को भी उनकी चुप्पी के लिए जमकर फटकार लगाई।

‘मेरठ से हूँ, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं.. पता दे फिर देखते हैं किसमें कितना दम है’: हम्जा ने धमकी के बाद अकाउंट...

"मैं भी मेरठ से हूँ, हापुड़ रोड मेरठ। कहाँ से है तू? और हम भी हिन्दुस्तानी हैं, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है, समझा? एड्रेस दे अपना, देखते हैं किसमें कितना दम है।"

किसी ने सुशांत को लटकते हुए नहीं देखा, गले पर बेल्ट के निशान दिख रहे थे: SC में बोले सुशांत के पिता

सुशांत के पिता ने कहा कि किसी ने भी सुशांत की बॉडी को पंखे से लटकते हुए नहीं देखा था और जब उनकी बहन कमरे के अंदर घुसी, तब तक बॉडी उतारी जा चुकी थी।

मेरठ में जुनैद समेत दर्जन भर मुस्लिमों ने किया हिंदू युवकों पर तलवार, चाकू, बेल्ट से हमला: 3 घायल, FIR दर्ज

संप्रदाय विशेष के जुनैद पुत्र फराहीम समेत दर्जन भर युवक डंडे, हॉकी और चाकू और तलवार से लैस होकर वहाँ पहुँचे और तीनों हिंदू युवकों पर हमला कर दिया।
00:14:24

शाह फैसल ने छोड़ी राजनीति, दोबारा बनेंगे IAS? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Shah Faesal Quitting Politics

शाह फैसल के राजनीति में आने पर मुसलमानों ने बढ़-चढ़कर दान दिया और समर्थन दिया था और अब जब उनके वापस से प्रशासनिक सेवा में जुड़ने की खबर आ रही है, तो वो लोग इसे कौम के साथ गद्दारी बता रहे हैं।

राम मंदिर का समर्थन करने पर अजीत पवार के बेटे को NCP सांसद सुप्रिया सुले ने अनुभवहीन बताकर किया किनारा

NCP सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि राम मंदिर पर पार्थ ने जो कहा, वह सब उनकी निजी राय है और लोकतंत्र में सभी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है।

हिंदुओं को भगाने, मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले साजिद को यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

UP पुलिस ने साजिद नाम के एक शख्स को नाबालिग लड़की के बलात्कार की धमकी देने और हिंदू समुदाय के खिलाफ फेसबुक पर हिंसक टिप्पणी शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

सचिन पायलट की वापसी से और गहराया संकट: फूट पड़ी कॉन्ग्रेस में, थूका-चाटा कॉन्ग्रेसियों ने, लेकिन दोषी कौन है? भाजपा…

ये झटका किसे है? सचिन पायलट अब राजस्थान में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नहीं रहे। न ही वो अब राज्य के उप-मुख्यमंत्री हैं। महीने भर उनका अपमान हुआ। कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें भला-बुरा कहा।

हमसे जुड़ें

246,500FansLike
64,563FollowersFollow
295,000SubscribersSubscribe
Advertisements