वरुण ग्रोवर की कविता 'कागज नहीं दिखाएँगे' को काटती बहुत अच्छी कविताओं में से एक कविता है ऊर्वी सिंह की। यह लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी की सहायक अध्यापिका हैं। सुनिए उनकी कविता, उन्हीं की आवाज में, जो तोड़ती है छद्म लिबरलों और स्वघोषित बौद्धिकता का भाव पाले बैठे लोगों का घमंड।
CAA विरोध में सिर्फ़ तिरंगा और महात्मा गाँधी की तस्वीर लेकर लोग चल रहे? सब कुछ शांति से हो रहा? देश में कहीं कोई दंगा नहीं? प्रोपेगेंडा पत्रकार राजदीप ने तो यही कहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें उनकी औकात बता दी गई - फोटो, वीडियो के साथ, प्रमाण देकर।
सोनिया गाँधी इटली से यहाँ आई हैं और उन्होंने नागरिकता ले ली थी, लेकिन यह लोग पाकिस्तान में सताए गए हमारे हिन्दू और सिख भाइयों को मिल रही नागरिकता का विरोध कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी उनके समूह का हिस्सा हैं, वे एक ही भाषा बोलते हैं।"
शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित। शरारती तत्वों पर ड्रोन से भी नज़र रखी जा रही है। 20 ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद। इसके अलावा, राज्य में पहले से ही धारा-144 लगी हुई है।
कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI के लगभग 150 सदस्य चोरी-छिपे दिल्ली आते हैं - वो भी एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करते हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया दंगों से ठीक 2 दिन पहले। अगले 2 दिनों तक ये सभी जामिया इलाक़े में ही कहीं छिपे रहते हैं। दंगे वाले दिन ये बाहर निकलते हैं और...
दोनों ने एक नौसेना अधिकारी के दो बच्चों का अपहरण किया। मगर टुच्चे कार चोरों से अपहरण जैसा बड़ा अपराध संभला नहीं। बेटा छोटा था, पकड़े जाने के डर से संजय चोपड़ा नाम के इस बच्चे की नृशंस हत्या कर दी दोनों ने मिलकर। बड़ी बहन गीता को भी बलात्कार के बाद मार डाला। इन्हीं दोनों को अरुंधति 'हीरो' के तौर पर...
"पूरी हिंसा के लिए कट्टरपंथी समूहों और मुख्यधारा की राजनैतिक पार्टियाँ जिम्मेदार हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) समेत समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भड़की हिंसा के लिए उत्तरदायी हैं।"
"मैं CAA और NRC के समर्थन में निकाली गई रैली में शामिल नहीं हो सका, क्योंकि मैं मीटिंग में बिज़ी था। मैं इसके लिए दु:ख व्यक्त करता हूँ। शिवसेना हमेशा से हिन्दुत्ववादी विचारधारा वाली पार्टी रही है। मैं इन दोनों मुद्दों का पुरज़ोर समर्थन करता हूँ, इसलिए मैं इस बारे में पत्र लिख रहा हूँ।"
"इस रजिस्टर में आपका नाम ज़रूर होना चाहिए, क्योंकि ये आपके बहुत काम आएगा। एनपीआर के बहुत सारे फायदे हैं। इसके जरिए ही 'यूनिक आइडेंटिटी कार्ड' मिलेगा। ये पहचान पत्र सरकारी योजनाओं में ख़ास कर के काम आएगा।"
NPR की शुरुआत मनमोहन सरकार के दौरान हुई। इसमें शामिल होना भारत में रह रहे लोगों के लिए अनिवार्य किया गया। साथ ही इसे NRIC की दिशा में पहला क़दम बताया गया। अमित शाह ने साफ किया है कि दोनों का कोई लेना-देना नहीं है।